44. सूरह अद-दुखान
The Smoke
ٱلدُّخَان

सूरह अद-दुखान

The Smoke
59 आयतेंमक्की

सूरह अद-दुखान (الدخان, अर्थ: The Smoke) क़ुरआन की 44वीं सूरह है। यह मक्की सूरह है जिसमें 59 आयतें हैं, और यह पारा 25 में मदनी मुसहफ़ के पृष्ठ 496 से शुरू होती है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
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सूरह अद-दुखान की सभी आयतें — अरबी और हिंदी अनुवाद

शब्दार्थ, उच्चारण और तफ़सीर के लिए कोई भी आयत खोलें।
  1. 44:1حمٓह़ा, मीम।
  2. 44:2وَٱلْكِتَٰبِ ٱلْمُبِينِक़सम है स्पष्ट करने वाली पुस्तक की।
  3. 44:3إِنَّآ أَنزَلْنَٰهُ فِى لَيْلَةٍ مُّبَٰرَكَةٍ ۚ إِنَّا كُنَّا مُنذِرِينَनिःसंदेह हमने इसे एक बरकत वाली रात में उतारा है। निःसंदेह हम डराने वाले थे।
  4. 44:4فِيهَا يُفْرَقُ كُلُّ أَمْرٍ حَكِيمٍइसी (रात) में प्रत्येक अटल मामले का निर्णय किया जाता है।
  5. 44:5أَمْرًا مِّنْ عِندِنَآ ۚ إِنَّا كُنَّا مُرْسِلِينَहमारी ओर से आदेश के कारण। निःसंदेह हम ही भेजने वाले थे।
  6. 44:6رَحْمَةً مِّن رَّبِّكَ ۚ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلسَّمِيعُ ٱلْعَلِيمُआपके पालनहार की दया के कारण। निश्चय वही सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
  7. 44:7رَبِّ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَآ ۖ إِن كُنتُم مُّوقِنِينَजो आकाशों तथा धरती और उन दोनों के बीच मौजूद सारी चीज़ों का पालनहार है, यदि तुम विश्वास करने वाले हो।
  8. 44:8لَآ إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ يُحْىِۦ وَيُمِيتُ ۖ رَبُّكُمْ وَرَبُّ ءَابَآئِكُمُ ٱلْأَوَّلِينَउसके अतिरिक्त कोई सत्य पूज्य नहीं। वही जीवित करता और मारता है। तुम्हारा पालनहार तथा तुम्हारे पहले बाप-दादाओं का पालनहार है।
  9. 44:9بَلْ هُمْ فِى شَكٍّ يَلْعَبُونَबल्कि वे संदेह में पड़े खेल रहे हैं।
  10. 44:10فَٱرْتَقِبْ يَوْمَ تَأْتِى ٱلسَّمَآءُ بِدُخَانٍ مُّبِينٍतो आप उस दिन की प्रतीक्षा करें, जब आकाश प्रत्यक्ष धुआँ लाएगा।
  11. 44:11يَغْشَى ٱلنَّاسَ ۖ هَٰذَا عَذَابٌ أَلِيمٌजो लोगों को ढाँप लेगा। यह दुःखदायी यातना है।
  12. 44:12رَّبَّنَا ٱكْشِفْ عَنَّا ٱلْعَذَابَ إِنَّا مُؤْمِنُونَऐ हमारे पालनहार! हमसे यह यातना दूर कर दे। निःसंदेह हम ईमान लाने वाले हैं।
  13. 44:13أَنَّىٰ لَهُمُ ٱلذِّكْرَىٰ وَقَدْ جَآءَهُمْ رَسُولٌ مُّبِينٌउनके लिए नसीहत कहाँ? हालाँकि, निश्चित रूप से उनके पास स्पष्ट करने वाला रसूल आ चुका।
  14. 44:14ثُمَّ تَوَلَّوْا۟ عَنْهُ وَقَالُوا۟ مُعَلَّمٌ مَّجْنُونٌफिर उन्होंने उससे मुँह फेर लिया और उन्होंने कहा : यह तो सिखाया हुआ है, यह पागल है।
  15. 44:15إِنَّا كَاشِفُوا۟ ٱلْعَذَابِ قَلِيلًا ۚ إِنَّكُمْ عَآئِدُونَनिःसंदेह हम इस यातना को थोड़ी देर के लिए दूर करने वाले हैं। (परंतु) निःसंदेह तुम फिर वही कुछ करने वाले हो।
  16. 44:16يَوْمَ نَبْطِشُ ٱلْبَطْشَةَ ٱلْكُبْرَىٰٓ إِنَّا مُنتَقِمُونَजिस दिन हम बड़ी पकड़ पकड़ेंगे, निःसंदेह हम बदला लेने वाले हैं।
  17. 44:17۞ وَلَقَدْ فَتَنَّا قَبْلَهُمْ قَوْمَ فِرْعَوْنَ وَجَآءَهُمْ رَسُولٌ كَرِيمٌतथा निःसंदेह हमने इनसे पूर्व फ़िरऔन की जाति की परीक्षा ली तथा उनके पास एक अति सम्मानित रसूल आया।
  18. 44:18أَنْ أَدُّوٓا۟ إِلَىَّ عِبَادَ ٱللَّهِ ۖ إِنِّى لَكُمْ رَسُولٌ أَمِينٌयह कि अल्लाह के बंदों को मेरे हवाले कर दो। निश्चय मैं तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ।
  19. 44:19وَأَن لَّا تَعْلُوا۟ عَلَى ٱللَّهِ ۖ إِنِّىٓ ءَاتِيكُم بِسُلْطَٰنٍ مُّبِينٍतथा यह कि अल्लाह के मुक़ाबले में सरकशी न करो, निःसंदेह मैं तुम्हारे पास स्पष्ट प्रमाण लाने वाला हूँ।
  20. 44:20وَإِنِّى عُذْتُ بِرَبِّى وَرَبِّكُمْ أَن تَرْجُمُونِतथा निःसंदेह मैंने अपने पालनहार तथा तुम्हारे पालनहार की इससे शरण ली है कि तुम मुझपर पथराव कर मेरी जान ले लो।
  21. 44:21وَإِن لَّمْ تُؤْمِنُوا۟ لِى فَٱعْتَزِلُونِऔर अगर तुम मेरी बात नहीं मानते, तो मुझसे दूर रहो।
  22. 44:22فَدَعَا رَبَّهُۥٓ أَنَّ هَٰٓؤُلَآءِ قَوْمٌ مُّجْرِمُونَअंततः उसने अपने पालनहार को पुकारा कि निःसंदेह ये अपराधी लोग हैं।
  23. 44:23فَأَسْرِ بِعِبَادِى لَيْلًا إِنَّكُم مُّتَّبَعُونَअतः तुम मेरे बंदों को लेकर रातों-रात चले जाओ। निःसंदेह तुम्हारा पीछा किया जाएगा।
  24. 44:24وَٱتْرُكِ ٱلْبَحْرَ رَهْوًا ۖ إِنَّهُمْ جُندٌ مُّغْرَقُونَतथा सागर को अपनी दशा पर ठहरा हुआ छोड़ दे। निःसंदेह वे एक ऐसी सेना हैं, जो डुबोए जाने वाले हैं।
  25. 44:25كَمْ تَرَكُوا۟ مِن جَنَّٰتٍ وَعُيُونٍवे कितने ही बाग़ और जल स्रोत छोड़ गए।
  26. 44:26وَزُرُوعٍ وَمَقَامٍ كَرِيمٍतथा खेतियाँ और बढ़िया स्थान।
  27. 44:27وَنَعْمَةٍ كَانُوا۟ فِيهَا فَٰكِهِينَतथा सुख-सामग्री, जिनमें वे आनंद ले रहे थे।
  28. 44:28كَذَٰلِكَ ۖ وَأَوْرَثْنَٰهَا قَوْمًا ءَاخَرِينَऐसा ही हुआ और हमने उनका उत्तराधिकारी दूसरे लोगों को बना दिया।
  29. 44:29فَمَا بَكَتْ عَلَيْهِمُ ٱلسَّمَآءُ وَٱلْأَرْضُ وَمَا كَانُوا۟ مُنظَرِينَफिर न उनपर आकाश और धरती रोए और न वे मोहलत पाने वाले हुए।
  30. 44:30وَلَقَدْ نَجَّيْنَا بَنِىٓ إِسْرَٰٓءِيلَ مِنَ ٱلْعَذَابِ ٱلْمُهِينِतथा निःसंदेह हमने इसराईल की संतान को अपमानकारी यातना से बचा लिया।
  31. 44:31مِن فِرْعَوْنَ ۚ إِنَّهُۥ كَانَ عَالِيًا مِّنَ ٱلْمُسْرِفِينَफ़िरऔन से। निःसंदेह वह हद से बढ़ने वालों में से एक सरकश व्यक्ति था।
  32. 44:32وَلَقَدِ ٱخْتَرْنَٰهُمْ عَلَىٰ عِلْمٍ عَلَى ٱلْعَٰلَمِينَतथा निःसंदेह हमने उन्हें ज्ञान के आधार पर संसार वासियों पर चुन लिया।
  33. 44:33وَءَاتَيْنَٰهُم مِّنَ ٱلَْٔايَٰتِ مَا فِيهِ بَلَٰٓؤٌا۟ مُّبِينٌतथा हमने उन्हें ऐसी निशानियाँ प्रदान कीं, जिनमें खुली परीछा थी।
  34. 44:34إِنَّ هَٰٓؤُلَآءِ لَيَقُولُونَनिःसंदेह ये लोग निश्चय कहते हैं।
  35. 44:35إِنْ هِىَ إِلَّا مَوْتَتُنَا ٱلْأُولَىٰ وَمَا نَحْنُ بِمُنشَرِينَकि हमारी इस पहली मृत्यु के सिवा कोई (मृत्यु) नहीं, और न हम कभी दोबारा उठाए जाएँगे।
  36. 44:36فَأْتُوا۟ بَِٔابَآئِنَآ إِن كُنتُمْ صَٰدِقِينَतो तुम हमारे बाप-दादा को ले आओ, यदि तुम सच्चे हो?
  37. 44:37أَهُمْ خَيْرٌ أَمْ قَوْمُ تُبَّعٍ وَٱلَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۚ أَهْلَكْنَٰهُمْ ۖ إِنَّهُمْ كَانُوا۟ مُجْرِمِينَक्या ये लोग बेहतर हैं, अथवा तुब्बा' की जाति तथा वे लोग जो उनसे पूर्व थे? हमने उन्हें विनष्ट कर दिया। निःसंदेह वे अपराधी थे।
  38. 44:38وَمَا خَلَقْنَا ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَا لَٰعِبِينَऔर हमने आकाशों और धरती को और जो कुछ उनके बीच है, खेलते हुए नहीं बनाया है।
  39. 44:39مَا خَلَقْنَٰهُمَآ إِلَّا بِٱلْحَقِّ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَهُمْ لَا يَعْلَمُونَहमने उन दोनों को सत्य ही के साथ पैदा किया है, किंतु उनमें से अधिकतर लोग नहीं जानते।
  40. 44:40إِنَّ يَوْمَ ٱلْفَصْلِ مِيقَٰتُهُمْ أَجْمَعِينَनिश्चय फ़ैसले का दिन उन सब का नियत समय है।
  41. 44:41يَوْمَ لَا يُغْنِى مَوْلًى عَن مَّوْلًى شَئًْا وَلَا هُمْ يُنصَرُونَजिस दिन कोई साथी किसी साथी के कुछ काम न आएगा और न उनकी सहायता की जाएगी।
  42. 44:42إِلَّا مَن رَّحِمَ ٱللَّهُ ۚ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلرَّحِيمُकिंतु जिसपर अल्लाह ने दया की, निःसंदेह वही सबपर प्रभुत्वशाली, अत्यंत दयावान है।
  43. 44:43إِنَّ شَجَرَتَ ٱلزَّقُّومِनिःसंदेह ज़क़्क़ूम (थूहड़) का वृक्ष।
  44. 44:44طَعَامُ ٱلْأَثِيمِपापी का भोजन है।
  45. 44:45كَٱلْمُهْلِ يَغْلِى فِى ٱلْبُطُونِपिघले हुए ताँबे (या तलछट) की तरह, पेटों में खौलता है।
  46. 44:46كَغَلْىِ ٱلْحَمِيمِगर्म पानी के खौलने की तरह।
  47. 44:47خُذُوهُ فَٱعْتِلُوهُ إِلَىٰ سَوَآءِ ٱلْجَحِيمِइसे पकड़ो, फिर इसे धधकती आग के बीच तक घसीटकर ले जाओ।
  48. 44:48ثُمَّ صُبُّوا۟ فَوْقَ رَأْسِهِۦ مِنْ عَذَابِ ٱلْحَمِيمِफिर खौलते हुए पानी की कुछ यातना उसके सिर पर उँडेल दो।
  49. 44:49ذُقْ إِنَّكَ أَنتَ ٱلْعَزِيزُ ٱلْكَرِيمُचख, निःसंदेह तू ही वह व्यक्ति है जो बड़ा बलशाली और सम्माननीय है।
  50. 44:50إِنَّ هَٰذَا مَا كُنتُم بِهِۦ تَمْتَرُونَनिःसंदे यह वही है जिसके बारे में तुम संदेह करते थे।
  51. 44:51إِنَّ ٱلْمُتَّقِينَ فِى مَقَامٍ أَمِينٍनिःसंदेह परहेज़गार लोग शांति एवं सुरक्षा वाली जगह में होंगे।
  52. 44:52فِى جَنَّٰتٍ وَعُيُونٍबाग़ों तथा जल स्रोतों में।
  53. 44:53يَلْبَسُونَ مِن سُندُسٍ وَإِسْتَبْرَقٍ مُّتَقَٰبِلِينَवे बारीक और गाढ़े रेशम के वस्त्र पहनेंगे, आमने-सामने बैठे होंगे।
  54. 44:54كَذَٰلِكَ وَزَوَّجْنَٰهُم بِحُورٍ عِينٍऐसा ही होगा और हम उनका विवाह गोरे बदन, काली आँखों वाली औरतों से कर देंगे, जो बड़ी-बड़ी आँखों वाली होंगी।
  55. 44:55يَدْعُونَ فِيهَا بِكُلِّ فَٰكِهَةٍ ءَامِنِينَवे उसमें निश्चिंत होकर हर प्रकार के फल मंगवाएँगे।
  56. 44:56لَا يَذُوقُونَ فِيهَا ٱلْمَوْتَ إِلَّا ٱلْمَوْتَةَ ٱلْأُولَىٰ ۖ وَوَقَىٰهُمْ عَذَابَ ٱلْجَحِيمِवे उसमें मृत्यु का स्वाद नहीं चखेंगे, परंतु वह मृत्यु जो पहली थी, और वह (अल्लाह) उन्हें दहकती हुई आग के अज़ाब से बचा लेगा।
  57. 44:57فَضْلًا مِّن رَّبِّكَ ۚ ذَٰلِكَ هُوَ ٱلْفَوْزُ ٱلْعَظِيمُआपके पालनहार की ओर से अनुग्रह के कारण। यही बहुत बड़ी सफलता है।
  58. 44:58فَإِنَّمَا يَسَّرْنَٰهُ بِلِسَانِكَ لَعَلَّهُمْ يَتَذَكَّرُونَसो तथ्य यही है कि हमने इसे आपकी भाषा में आसान कर दिया है, ताकि वे नसीहत ग्रहण करें।
  59. 44:59فَٱرْتَقِبْ إِنَّهُم مُّرْتَقِبُونَअतः आप प्रतीक्षा करें, निःसंदेह वे भी प्रतीक्षा करने वाले हैं।
सूरह सुनेंMishary Alafasy