ٱلذَّارِيَات
सूरह अध-धारियात
The Winnowing Winds
60 आयतेंमक्की
सूरह अध-धारियात (الذاريات, अर्थ: The Winnowing Winds) क़ुरआन की 51वीं सूरह है। यह मक्की सूरह है जिसमें 60 आयतें हैं, और यह पारा 26 में मदनी मुसहफ़ के पृष्ठ 520 से शुरू होती है।
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
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सूरह अध-धारियात की सभी आयतें — अरबी और हिंदी अनुवाद
शब्दार्थ, उच्चारण और तफ़सीर के लिए कोई भी आयत खोलें।
- 51:1وَٱلذَّٰرِيَٰتِ ذَرْوًاक़सम है उन (हवाओं) की जो (धूल आदि) उड़ाने वाली हैं!
- 51:2فَٱلْحَٰمِلَٰتِ وِقْرًاफिर पानी का बड़ा भारी बोझ उठाने वाले बादलों की!
- 51:3فَٱلْجَٰرِيَٰتِ يُسْرًاफिर आसानी से चलने वाली नावों की!
- 51:4فَٱلْمُقَسِّمَٰتِ أَمْرًاफिर (अल्लाह का) आदेश बाँटने वाले (फ़रिश्तों की)!
- 51:5إِنَّمَا تُوعَدُونَ لَصَادِقٌनिःसंदेह जो तुमसे वादा किया जाता है, निश्चय वह सत्य है।
- 51:6وَإِنَّ ٱلدِّينَ لَوَٰقِعٌतथा निःसंदेह हिसाब अनिवार्य रूप से घटित होने वाला है।
- 51:7وَٱلسَّمَآءِ ذَاتِ ٱلْحُبُكِक़सम है रास्तों वाले आकाश की!
- 51:8إِنَّكُمْ لَفِى قَوْلٍ مُّخْتَلِفٍनिःसंदेह तुम निश्चय एक विवादास्पद बात में पड़े हो।
- 51:9يُؤْفَكُ عَنْهُ مَنْ أُفِكَउससे वही फेरा जाता है, जो (अल्लाह के ज्ञान में) फेर दिया गया है।
- 51:10قُتِلَ ٱلْخَرَّٰصُونَअटकल लगाने वाले मारे गए।
- 51:11ٱلَّذِينَ هُمْ فِى غَمْرَةٍ سَاهُونَजो बड़ी ग़फ़लत में भूले हुए हैं।
- 51:12يَسَْٔلُونَ أَيَّانَ يَوْمُ ٱلدِّينِवे पूछते हैं कि बदले का दिन कब है?
- 51:13يَوْمَ هُمْ عَلَى ٱلنَّارِ يُفْتَنُونَजिस दिन वे आग पर तपाए जाएँगे।
- 51:14ذُوقُوا۟ فِتْنَتَكُمْ هَٰذَا ٱلَّذِى كُنتُم بِهِۦ تَسْتَعْجِلُونَअपने फ़ितने (यातना) का मज़ा चखो, यही है जिसके लिए तुम जल्दी मचा रहे थे।
- 51:15إِنَّ ٱلْمُتَّقِينَ فِى جَنَّٰتٍ وَعُيُونٍनिःसंदेह परहेज़गार लोग बाग़ों और जल स्रोतों में होंगे।
- 51:16ءَاخِذِينَ مَآ ءَاتَىٰهُمْ رَبُّهُمْ ۚ إِنَّهُمْ كَانُوا۟ قَبْلَ ذَٰلِكَ مُحْسِنِينَजो कुछ उनका रब उन्हें देगा, उसे वे लेने वाले होंगे। निश्चय ही वे इससे पहले नेकी करने वाले थे।
- 51:17كَانُوا۟ قَلِيلًا مِّنَ ٱلَّيْلِ مَا يَهْجَعُونَवे रात के बहुत थोड़े भाग में सोते थे।
- 51:18وَبِٱلْأَسْحَارِ هُمْ يَسْتَغْفِرُونَतथा रात्रि की अंतिम घड़ियों में वे क्षमा याचना करते थे।
- 51:19وَفِىٓ أَمْوَٰلِهِمْ حَقٌّ لِّلسَّآئِلِ وَٱلْمَحْرُومِऔर उनके धनों में माँगने वाले तथा वंचित के लिए एक हक़ (हिस्सा) था।
- 51:20وَفِى ٱلْأَرْضِ ءَايَٰتٌ لِّلْمُوقِنِينَतथा धरती में विश्वास करने वालों के लिए बहुत-सी निशानियाँ हैं।
- 51:21وَفِىٓ أَنفُسِكُمْ ۚ أَفَلَا تُبْصِرُونَतथा स्वयं तुम्हारे भीतर (भी)। तो क्या तुम नहीं देखते?
- 51:22وَفِى ٱلسَّمَآءِ رِزْقُكُمْ وَمَا تُوعَدُونَऔर आकाश ही में तुम्हारी रोज़ी है तथा वह भी जिसका तुमसे वादा किया जा रहा है।
- 51:23فَوَرَبِّ ٱلسَّمَآءِ وَٱلْأَرْضِ إِنَّهُۥ لَحَقٌّ مِّثْلَ مَآ أَنَّكُمْ تَنطِقُونَसो क़सम है आकाश एवं धरती के पालनहार की! निःसंदेह यह बात निश्चित रूप से सत्य है, इस बात की तरह कि निःसंदेह तुम बोलते हो।
- 51:24هَلْ أَتَىٰكَ حَدِيثُ ضَيْفِ إِبْرَٰهِيمَ ٱلْمُكْرَمِينَक्या आपके पास इबराहीम के सम्मानित अतिथियों की सूचना आई है?
- 51:25إِذْ دَخَلُوا۟ عَلَيْهِ فَقَالُوا۟ سَلَٰمًا ۖ قَالَ سَلَٰمٌ قَوْمٌ مُّنكَرُونَजब वे उसके पास आए, तो उन्होंने सलाम कहा। उसने कहा : सलाम हो। कुछ अपरिचित लोग हैं।
- 51:26فَرَاغَ إِلَىٰٓ أَهْلِهِۦ فَجَآءَ بِعِجْلٍ سَمِينٍफिर वह चुपके से अपने घरवालों के पास गया। फिर एक मोटा-ताज़ा (भुना हुआ) बछड़ा ले आया।
- 51:27فَقَرَّبَهُۥٓ إِلَيْهِمْ قَالَ أَلَا تَأْكُلُونَफिर उसे उनके सामने रख दिया। कहा : क्या तुम नहीं खाते?
- 51:28فَأَوْجَسَ مِنْهُمْ خِيفَةً ۖ قَالُوا۟ لَا تَخَفْ ۖ وَبَشَّرُوهُ بِغُلَٰمٍ عَلِيمٍतो उसने उनसे दिल में डर महसूस किया। उन्होंने कहा : डरो नहीं। और उन्होंने उसे एक बहुत ही ज्ञानी पुत्र की शुभ-सूचना दी।
- 51:29فَأَقْبَلَتِ ٱمْرَأَتُهُۥ فِى صَرَّةٍ فَصَكَّتْ وَجْهَهَا وَقَالَتْ عَجُوزٌ عَقِيمٌयह सुनकर उसकी पत्नी चिल्लाती हुई आगे आई, तो उसने अपना चेहरा पीट लिया और बोली : बूढ़ी बाँझ!
- 51:30قَالُوا۟ كَذَٰلِكِ قَالَ رَبُّكِ ۖ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلْحَكِيمُ ٱلْعَلِيمُउन्होंने कहा : तेरे पालनहार ने ऐसे ही फरमाया है। निश्चय वही पूर्ण हिकमत वाला, अत्यंत ज्ञानी है।
- 51:31۞ قَالَ فَمَا خَطْبُكُمْ أَيُّهَا ٱلْمُرْسَلُونَउसने कहा : ऐ भेजे हुए (दूतो!) तुम्हारा अभियान क्या है?
- 51:32قَالُوٓا۟ إِنَّآ أُرْسِلْنَآ إِلَىٰ قَوْمٍ مُّجْرِمِينَउन्होंने कहा : निःसंदेह हम कुछ अपराधी लोगों की ओर भेजे गए हैं।
- 51:33لِنُرْسِلَ عَلَيْهِمْ حِجَارَةً مِّن طِينٍताकि हम उनपर मिट्टी के पत्थर बरसाएँ।
- 51:34مُّسَوَّمَةً عِندَ رَبِّكَ لِلْمُسْرِفِينَजो तुम्हारे पालनहार के पास से सीमा से आगे बढ़ने वालों के लिए चिह्नित हैं।
- 51:35فَأَخْرَجْنَا مَن كَانَ فِيهَا مِنَ ٱلْمُؤْمِنِينَफिर हमने उस (बस्ती) में जो भी ईमानवाले थे उन्हें निकाल लिया।
- 51:36فَمَا وَجَدْنَا فِيهَا غَيْرَ بَيْتٍ مِّنَ ٱلْمُسْلِمِينَतो हमने उसमें मुसलमानों के एक घर के सिवा कोई और नहीं पाया।
- 51:37وَتَرَكْنَا فِيهَآ ءَايَةً لِّلَّذِينَ يَخَافُونَ ٱلْعَذَابَ ٱلْأَلِيمَतथा हमने उसमें उन लोगों के लिए एक निशानी छोड़ दी, जो दुःखदायी यातना से डरते हैं।
- 51:38وَفِى مُوسَىٰٓ إِذْ أَرْسَلْنَٰهُ إِلَىٰ فِرْعَوْنَ بِسُلْطَٰنٍ مُّبِينٍतथा मूसा (की कहानी) में (भी एक निशानी है), जब हमने उसे फ़िरऔन की ओर एक स्पष्ट प्रमाण देकर भेजा।
- 51:39فَتَوَلَّىٰ بِرُكْنِهِۦ وَقَالَ سَٰحِرٌ أَوْ مَجْنُونٌतो उसने अपनी शक्ति के कारण मुँह फेर लिया और उसने कहा : यह जादूगर है, या पागल।
- 51:40فَأَخَذْنَٰهُ وَجُنُودَهُۥ فَنَبَذْنَٰهُمْ فِى ٱلْيَمِّ وَهُوَ مُلِيمٌअंततः हमने उसे और उसकी सेनाओं को पकड़ लिया, फिर उन्हें समुद्र में फेंक दिया, जबकि वह एक निंदनीय काम करने वाला था।
- 51:41وَفِى عَادٍ إِذْ أَرْسَلْنَا عَلَيْهِمُ ٱلرِّيحَ ٱلْعَقِيمَतथा आद में, जब हमने उनपर बाँझ हवा भेजी दी।
- 51:42مَا تَذَرُ مِن شَىْءٍ أَتَتْ عَلَيْهِ إِلَّا جَعَلَتْهُ كَٱلرَّمِيمِवह जिस चीज़ पर से भी गुज़रती, उसे सड़ी हुई हड्डी की तरह कर देती थी।
- 51:43وَفِى ثَمُودَ إِذْ قِيلَ لَهُمْ تَمَتَّعُوا۟ حَتَّىٰ حِينٍतथा समूद में, जब उनसे कहा गया कि एक समय तक के लिए लाभ उठा लो।
- 51:44فَعَتَوْا۟ عَنْ أَمْرِ رَبِّهِمْ فَأَخَذَتْهُمُ ٱلصَّٰعِقَةُ وَهُمْ يَنظُرُونَफिर उन्होंने अपने पालनहार के आदेश की अवज्ञा की, तो उन्हें कड़क ने पकड़ लिया और वे देख रहे थे।
- 51:45فَمَا ٱسْتَطَٰعُوا۟ مِن قِيَامٍ وَمَا كَانُوا۟ مُنتَصِرِينَफिर उनमें न तो खड़े होने की शक्ति थी और न ही वे प्रतिकार करने वाले थे।
- 51:46وَقَوْمَ نُوحٍ مِّن قَبْلُ ۖ إِنَّهُمْ كَانُوا۟ قَوْمًا فَٰسِقِينَतथा इससे पहले नूह़ की जाति को (विनष्ट कर दिया)। निश्चय ही वे अवज्ञाकारी लोग थे।
- 51:47وَٱلسَّمَآءَ بَنَيْنَٰهَا بِأَيْي۟دٍ وَإِنَّا لَمُوسِعُونَतथा आकाश को हमने शक्ति के साथ बनाया और निःसंदेह हम निश्चय विस्तार करने वाले हैं।
- 51:48وَٱلْأَرْضَ فَرَشْنَٰهَا فَنِعْمَ ٱلْمَٰهِدُونَतथा धरती को हमने बिछा दिया, तो हम क्या ही खूब बिछाने वाले हैं।
- 51:49وَمِن كُلِّ شَىْءٍ خَلَقْنَا زَوْجَيْنِ لَعَلَّكُمْ تَذَكَّرُونَतथा हमने हर चीज़ के दो प्रकार बनाए, ताकि तुम नसीहत ग्रहण करो।
- 51:50فَفِرُّوٓا۟ إِلَى ٱللَّهِ ۖ إِنِّى لَكُم مِّنْهُ نَذِيرٌ مُّبِينٌअतः अल्लाह की ओर दौड़ो। निश्चय ही मैं तुम्हारे लिए उसकी ओर से स्पष्ट सचेतकर्ता हूँ।
- 51:51وَلَا تَجْعَلُوا۟ مَعَ ٱللَّهِ إِلَٰهًا ءَاخَرَ ۖ إِنِّى لَكُم مِّنْهُ نَذِيرٌ مُّبِينٌऔर अल्लाह के साथ कोई दूसरा पूज्य मत बनाओ। निःसंदेह मैं तुम्हारे लिए उसकी ओर से खुला डराने वाला हूँ।
- 51:52كَذَٰلِكَ مَآ أَتَى ٱلَّذِينَ مِن قَبْلِهِم مِّن رَّسُولٍ إِلَّا قَالُوا۟ سَاحِرٌ أَوْ مَجْنُونٌइसी प्रकार, उन लोगों के पास जो इनसे पहले थे, जब भी कोई रसूल आया, तो उन्होंने कहा : यह जादूगर है, या पागल।
- 51:53أَتَوَاصَوْا۟ بِهِۦ ۚ بَلْ هُمْ قَوْمٌ طَاغُونَक्या उन्होंने एक-दूसरे को इस (बात) की वसीयत की है? बल्कि वे (स्वयं ही) सरकश लोग हैं।
- 51:54فَتَوَلَّ عَنْهُمْ فَمَآ أَنتَ بِمَلُومٍअतः आप उनसे मुँह फेर लें। क्योंकि आपपर कोई दोष नहीं है।
- 51:55وَذَكِّرْ فَإِنَّ ٱلذِّكْرَىٰ تَنفَعُ ٱلْمُؤْمِنِينَतथा आप नसीहत करें। क्योंकि निश्चय नसीहत ईमानवालों को लाभ देताी है।
- 51:56وَمَا خَلَقْتُ ٱلْجِنَّ وَٱلْإِنسَ إِلَّا لِيَعْبُدُونِऔर मैंने जिन्नों तथा मनुष्यों को केवल इसलिए पैदा किया है कि वे मेरी इबादत करें।
- 51:57مَآ أُرِيدُ مِنْهُم مِّن رِّزْقٍ وَمَآ أُرِيدُ أَن يُطْعِمُونِमैं उनसे कोई रोज़ी नहीं चाहता और न यह चाहता हूँ कि वे मुझे खिलाएँ।
- 51:58إِنَّ ٱللَّهَ هُوَ ٱلرَّزَّاقُ ذُو ٱلْقُوَّةِ ٱلْمَتِينُनिःसंदेह अल्लाह ही बहुत रोज़ी देनेवाला, बड़ा शक्तिशाली, अत्यंत मज़बूत है।
- 51:59فَإِنَّ لِلَّذِينَ ظَلَمُوا۟ ذَنُوبًا مِّثْلَ ذَنُوبِ أَصْحَٰبِهِمْ فَلَا يَسْتَعْجِلُونِअतः निश्चय उन लोगों के लिए जिन्होंने अत्याचार किया, उनके साथियों के हिस्से की तरह (यातना का) एक हिस्सा है। सो वे मुझसे जल्दी न मचाएँ।
- 51:60فَوَيْلٌ لِّلَّذِينَ كَفَرُوا۟ مِن يَوْمِهِمُ ٱلَّذِى يُوعَدُونَअतः इनकार करने वालों के लिए उनके उस दिन से बड़ा विनाश है, जिसका उनसे वादा किया जा रहा है।
सूरह सुनेंMishary Alafasy