15. सूरह अल-हिज्र
The Rocky Tract
ٱلْحِجْر

सूरह अल-हिज्र

The Rocky Tract
99 आयतेंमक्की

सूरह अल-हिज्र (الحجر, अर्थ: The Rocky Tract) क़ुरआन की 15वीं सूरह है। यह मक्की सूरह है जिसमें 99 आयतें हैं, और यह पारा 14 में मदनी मुसहफ़ के पृष्ठ 262 से शुरू होती है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
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सूरह अल-हिज्र की सभी आयतें — अरबी और हिंदी अनुवाद

शब्दार्थ, उच्चारण और तफ़सीर के लिए कोई भी आयत खोलें।
  1. 15:1الٓر ۚ تِلْكَ ءَايَٰتُ ٱلْكِتَٰبِ وَقُرْءَانٍ مُّبِينٍअलिफ़, लाम, रा। ये किताब और स्पष्ट क़ुरआन की आयतें हैं।
  2. 15:2رُّبَمَا يَوَدُّ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ لَوْ كَانُوا۟ مُسْلِمِينَ(एक समय आएगा कि) काफ़िर चाहेंगे कि काश वे (दुनिया में) मुसलमान होते!
  3. 15:3ذَرْهُمْ يَأْكُلُوا۟ وَيَتَمَتَّعُوا۟ وَيُلْهِهِمُ ٱلْأَمَلُ ۖ فَسَوْفَ يَعْلَمُونَ(ऐ नबी!) आप उन्हें छोड़ दें। वे खाएँ और लाभ उठाएँ, तथा (लंबी) आशा उन्हें ग़ाफ़िल रखे, फिर शीघ्र ही जान लेंगे।
  4. 15:4وَمَآ أَهْلَكْنَا مِن قَرْيَةٍ إِلَّا وَلَهَا كِتَابٌ مَّعْلُومٌऔर हमने जिस बस्ती को भी नष्ट किया, उसका एक निर्धारित समय था।
  5. 15:5مَّا تَسْبِقُ مِنْ أُمَّةٍ أَجَلَهَا وَمَا يَسْتَْٔخِرُونَकोई जाति अपने नियत समय से न आगे बढ़ती है और न वे पीछे रहते हैं।
  6. 15:6وَقَالُوا۟ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِى نُزِّلَ عَلَيْهِ ٱلذِّكْرُ إِنَّكَ لَمَجْنُونٌतथा उन (काफ़िरों) ने कहा : ऐ वह व्यक्ति जिसपर स्मरण (क़ुरआन) अवतरित किया गया है, निःसंदेह तू तो पागल है।
  7. 15:7لَّوْ مَا تَأْتِينَا بِٱلْمَلَٰٓئِكَةِ إِن كُنتَ مِنَ ٱلصَّٰدِقِينَयदि तू सच्चों में से है, तो हमारे पास फ़रिश्तों को क्यों नहीं ले आता?
  8. 15:8مَا نُنَزِّلُ ٱلْمَلَٰٓئِكَةَ إِلَّا بِٱلْحَقِّ وَمَا كَانُوٓا۟ إِذًا مُّنظَرِينَहम फ़रिश्तों को सत्य के साथ ही उतारते हैं और उस समय उन्हें कोई मोहलत नहीं दी जाती।
  9. 15:9إِنَّا نَحْنُ نَزَّلْنَا ٱلذِّكْرَ وَإِنَّا لَهُۥ لَحَٰفِظُونَनिःसंदेह हमने ही यह ज़िक्र (क़ुरआन) उतारी है और निःसंदेह हम ही इसकी अवश्य रक्षा करने वाले हैं।
  10. 15:10وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا مِن قَبْلِكَ فِى شِيَعِ ٱلْأَوَّلِينَऔर निःसंदेह हमने आपसे पहले विगत समुदायों के समूहों में रसूल भेजे हैं।
  11. 15:11وَمَا يَأْتِيهِم مِّن رَّسُولٍ إِلَّا كَانُوا۟ بِهِۦ يَسْتَهْزِءُونَऔर उनके पास जो भी रसूल आता, वे उसका मज़ाक उड़ाया करते थे।
  12. 15:12كَذَٰلِكَ نَسْلُكُهُۥ فِى قُلُوبِ ٱلْمُجْرِمِينَइसी तरह हम यह (झुठलाने की प्रवृत्ति) अपराधियों के दिलों में डाल देते हैं।
  13. 15:13لَا يُؤْمِنُونَ بِهِۦ ۖ وَقَدْ خَلَتْ سُنَّةُ ٱلْأَوَّلِينَवे उसपर ईमान नहीं लाते। और प्रथम जातियों से यही परंपरा चली आ रही है।
  14. 15:14وَلَوْ فَتَحْنَا عَلَيْهِم بَابًا مِّنَ ٱلسَّمَآءِ فَظَلُّوا۟ فِيهِ يَعْرُجُونَऔर यदि हम उनपर आकाश का कोई द्वार खोल दें, फिर वे उसमें चढ़ते चले जाएँ।
  15. 15:15لَقَالُوٓا۟ إِنَّمَا سُكِّرَتْ أَبْصَٰرُنَا بَلْ نَحْنُ قَوْمٌ مَّسْحُورُونَतब भी निश्चय वे यही कहेंगे कि हमारी निगाहें बाँध दी गई हैं। बल्कि हमपर जादू कर दिया गया है।
  16. 15:16وَلَقَدْ جَعَلْنَا فِى ٱلسَّمَآءِ بُرُوجًا وَزَيَّنَّٰهَا لِلنَّٰظِرِينَनिःसंदेह हमने आकाश में कई बुर्ज (बड़े सितारे) बनाए हैं और उन्हें देखने वालों के लिए सुशोभित किया है।
  17. 15:17وَحَفِظْنَٰهَا مِن كُلِّ شَيْطَٰنٍ رَّجِيمٍऔर हमने उसे प्रत्येक धिक्कारे हुए शैतान से सुरक्षित किया है।
  18. 15:18إِلَّا مَنِ ٱسْتَرَقَ ٱلسَّمْعَ فَأَتْبَعَهُۥ شِهَابٌ مُّبِينٌपरंतु जो (शैतान) चोरी-छिपे सुनना चाहे, तो एक स्पष्ट ज्वाला (उल्का) उसका पीछा करती है।
  19. 15:19وَٱلْأَرْضَ مَدَدْنَٰهَا وَأَلْقَيْنَا فِيهَا رَوَٰسِىَ وَأَنۢبَتْنَا فِيهَا مِن كُلِّ شَىْءٍ مَّوْزُونٍऔर हमने धरती को फैलाया और उसमें पर्वत डाल (गाड़) दिए और उसमें हर चीज़ निर्धारित मात्रा में उगाई।
  20. 15:20وَجَعَلْنَا لَكُمْ فِيهَا مَعَٰيِشَ وَمَن لَّسْتُمْ لَهُۥ بِرَٰزِقِينَऔर हमने उसमें तुम्हारे लिए जीवन के संसाधन बना दिए। तथा उनके लिए (भी) जिन्हें तुम हरगिज़ रोज़ी देने वाले नहीं।
  21. 15:21وَإِن مِّن شَىْءٍ إِلَّا عِندَنَا خَزَآئِنُهُۥ وَمَا نُنَزِّلُهُۥٓ إِلَّا بِقَدَرٍ مَّعْلُومٍऔर कोई चीज़ ऐसी नहीं है, जिसके ख़ज़ाने हमारे पास न हों। और हम उसे एक निश्चित मात्रा ही में उतारते हैं।
  22. 15:22وَأَرْسَلْنَا ٱلرِّيَٰحَ لَوَٰقِحَ فَأَنزَلْنَا مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءً فَأَسْقَيْنَٰكُمُوهُ وَمَآ أَنتُمْ لَهُۥ بِخَٰزِنِينَऔर हमने बादलों को पानी से गर्भित करने वाली हवाओं को भेजा, फिर हमने आकाश से पानी उतारा, और उसे तुम्हें पिलाया, तथा तुम हरगिज़ उसे संग्रह करने वाले नहीं।
  23. 15:23وَإِنَّا لَنَحْنُ نُحْىِۦ وَنُمِيتُ وَنَحْنُ ٱلْوَٰرِثُونَतथा निःसंदेह हम ही जीवित करते और मारते हैं और हम ही (सबके) उत्तराधिकारी हैं।
  24. 15:24وَلَقَدْ عَلِمْنَا ٱلْمُسْتَقْدِمِينَ مِنكُمْ وَلَقَدْ عَلِمْنَا ٱلْمُسْتَْٔخِرِينَतथा निःसंदेह हम तुम्हारे पहले लोगों को भी जानते हैं, और बाद में आने वालों को भी जानते हैं।
  25. 15:25وَإِنَّ رَبَّكَ هُوَ يَحْشُرُهُمْ ۚ إِنَّهُۥ حَكِيمٌ عَلِيمٌऔर निःसंदेह आपका पालनहार ही उन्हें इकट्ठा करेगा। निश्चय वह पूर्ण हिकमत वाला, सब कुछ जानने वाला है।
  26. 15:26وَلَقَدْ خَلَقْنَا ٱلْإِنسَٰنَ مِن صَلْصَٰلٍ مِّنْ حَمَإٍ مَّسْنُونٍऔर निःसंदेह हमने मनुष्य को सड़े हुए गारे की खनखनाती हुई मिट्टी से बनाया है।
  27. 15:27وَٱلْجَآنَّ خَلَقْنَٰهُ مِن قَبْلُ مِن نَّارِ ٱلسَّمُومِऔर इससे पहले जिन्नों को हमने धुँआ रहित अति गर्म आग से पैदा किया।
  28. 15:28وَإِذْ قَالَ رَبُّكَ لِلْمَلَٰٓئِكَةِ إِنِّى خَٰلِقٌۢ بَشَرًا مِّن صَلْصَٰلٍ مِّنْ حَمَإٍ مَّسْنُونٍऔर (याद करो) जब आपके पालनहार ने फ़रिश्तों से कहा : मैं सड़े हुए गारे की खनखनाती मिट्टी से एक मनुष्य पैदा करने वाला हूँ।
  29. 15:29فَإِذَا سَوَّيْتُهُۥ وَنَفَخْتُ فِيهِ مِن رُّوحِى فَقَعُوا۟ لَهُۥ سَٰجِدِينَतो जब मैं उसे पूरा बना लूँ और उसमें अपनी रूह़ फूँक दूँ, तो तुम उसके आगे सजदा करते हुए गिर जाओ।
  30. 15:30فَسَجَدَ ٱلْمَلَٰٓئِكَةُ كُلُّهُمْ أَجْمَعُونَतो सब के सब फ़रिश्तों ने सजदा किया।
  31. 15:31إِلَّآ إِبْلِيسَ أَبَىٰٓ أَن يَكُونَ مَعَ ٱلسَّٰجِدِينَसिवाय इबलीस के। उसने सजदा करने वालों के साथ शामिल होने से इनकार कर दिया।
  32. 15:32قَالَ يَٰٓإِبْلِيسُ مَا لَكَ أَلَّا تَكُونَ مَعَ ٱلسَّٰجِدِينَअल्लाह ने पूछा : ऐ इबलीस! तुझे क्या हुआ कि तू सजदा करने वालों में शामिल नहीं हुआॽ
  33. 15:33قَالَ لَمْ أَكُن لِّأَسْجُدَ لِبَشَرٍ خَلَقْتَهُۥ مِن صَلْصَٰلٍ مِّنْ حَمَإٍ مَّسْنُونٍउसने कहा : मैं ऐसा नहीं कि एक मनुष्य को सजदा करूँ, जिसे तूने सड़े हुए गारे की खनखनाती मिट्टी से पैदा किया है।
  34. 15:34قَالَ فَٱخْرُجْ مِنْهَا فَإِنَّكَ رَجِيمٌअल्लाह ने कहा : फिर तू यहाँ से निकल जा। क्योंकि निश्चय तू धिक्कारा हुआ है।
  35. 15:35وَإِنَّ عَلَيْكَ ٱللَّعْنَةَ إِلَىٰ يَوْمِ ٱلدِّينِऔर निःसंदेह तुझपर बदले (क़ियामत) के दिन तक धिक्कार है।
  36. 15:36قَالَ رَبِّ فَأَنظِرْنِىٓ إِلَىٰ يَوْمِ يُبْعَثُونَउस (इबलीस) ने कहा : ऐ मेरे पालनहार! तो फिर मुझे उस दिन तक मोहलत दे, जब वे (पुनः जीवित कर) उठाए जाएँगे।
  37. 15:37قَالَ فَإِنَّكَ مِنَ ٱلْمُنظَرِينَ(अल्लाह ने) कहा : तू निःसंदेह मोहलत दिए गए लोगों में से है।
  38. 15:38إِلَىٰ يَوْمِ ٱلْوَقْتِ ٱلْمَعْلُومِज्ञात समय के दिन तक।
  39. 15:39قَالَ رَبِّ بِمَآ أَغْوَيْتَنِى لَأُزَيِّنَنَّ لَهُمْ فِى ٱلْأَرْضِ وَلَأُغْوِيَنَّهُمْ أَجْمَعِينَवह बोला : ऐ मेरे पालनहार! चूँकि तूने मुझे पथभ्रष्ट किया है, मैं अवश्य ही उनके लिए धरती में (पाप को) सुशोभित करूँगा और उन सभी को पथभ्रष्ट कर दूँगा।
  40. 15:40إِلَّا عِبَادَكَ مِنْهُمُ ٱلْمُخْلَصِينَसिवाय तेरे उनमें से चुने हुए बंदों के।
  41. 15:41قَالَ هَٰذَا صِرَٰطٌ عَلَىَّ مُسْتَقِيمٌ(अल्लाह ने) कहा : यह रास्ता है जो मुझ तक सीधा है।
  42. 15:42إِنَّ عِبَادِى لَيْسَ لَكَ عَلَيْهِمْ سُلْطَٰنٌ إِلَّا مَنِ ٱتَّبَعَكَ مِنَ ٱلْغَاوِينَनिःसंदेह मेरे बंदों पर तेरा कोई वश नहीं, परंतु जो बहके हुए लोगों में से तेरे पीछे चले।
  43. 15:43وَإِنَّ جَهَنَّمَ لَمَوْعِدُهُمْ أَجْمَعِينَऔर निश्चय ही उन सब के वादा की जगह जहन्नम है।
  44. 15:44لَهَا سَبْعَةُ أَبْوَٰبٍ لِّكُلِّ بَابٍ مِّنْهُمْ جُزْءٌ مَّقْسُومٌउस (जहन्नम) के सात द्वार हैं। और प्रत्येक द्वार के लिए उन (इबलीस के अनुयायियों) का एक विभाजित भाग है।
  45. 15:45إِنَّ ٱلْمُتَّقِينَ فِى جَنَّٰتٍ وَعُيُونٍनिःसंदेह आज्ञाकारी लोग जन्नतों तथा स्रोतों में होंगे।
  46. 15:46ٱدْخُلُوهَا بِسَلَٰمٍ ءَامِنِينَ(उनसे कहा जाएगा :) इसमें सलामती के साथ निर्भय होकर प्रवेश कर जाओ।
  47. 15:47وَنَزَعْنَا مَا فِى صُدُورِهِم مِّنْ غِلٍّ إِخْوَٰنًا عَلَىٰ سُرُرٍ مُّتَقَٰبِلِينَऔर हम निकाल देंगे उनके दिलों में जो कुछ द्वेष होगा। वे भाई-भाई होकर एक-दूसरे के आमने-सामने तख़्तों पर (बैठे) होंगे।
  48. 15:48لَا يَمَسُّهُمْ فِيهَا نَصَبٌ وَمَا هُم مِّنْهَا بِمُخْرَجِينَन उसमें उन्हें कोई थकान होगी और न वे वहाँ से निकाले जाएँगे।
  49. 15:49۞ نَبِّئْ عِبَادِىٓ أَنِّىٓ أَنَا ٱلْغَفُورُ ٱلرَّحِيمُ(ऐ नबी!) आप मेरे बंदों को सूचित कर दें कि निःसंदेह मैं ही बड़ा क्षमाशील, अत्यंत दयावान् हूँ।
  50. 15:50وَأَنَّ عَذَابِى هُوَ ٱلْعَذَابُ ٱلْأَلِيمُऔर यह भी कि निःसंदेह मेरी यातना ही कष्टदायक यातना है।
  51. 15:51وَنَبِّئْهُمْ عَن ضَيْفِ إِبْرَٰهِيمَऔर आप उन्हें इबराहीम (अलैहिस्सलाम) के अतिथियों के बारे में सूचित कर दें।
  52. 15:52إِذْ دَخَلُوا۟ عَلَيْهِ فَقَالُوا۟ سَلَٰمًا قَالَ إِنَّا مِنكُمْ وَجِلُونَजब वे इबराहीम के पास आए, तो उन्होंने सलाम किया। उसने कहा : हमें तो तुमसे डर लग रहा है।
  53. 15:53قَالُوا۟ لَا تَوْجَلْ إِنَّا نُبَشِّرُكَ بِغُلَٰمٍ عَلِيمٍउन्होंने कहा : डरिए नहीं, निःसंदेह हम आपको एक ज्ञानी बालक की शुभ सूचना देते हैं।
  54. 15:54قَالَ أَبَشَّرْتُمُونِى عَلَىٰٓ أَن مَّسَّنِىَ ٱلْكِبَرُ فَبِمَ تُبَشِّرُونَउसने कहा : क्या तुम मुझे इस बुढ़ापे के आ जाने के उपरांत शुभ सूचना दे रहे हो? तो तुम किस आधार पर यह शुभ सूचना दे रहे होॽ
  55. 15:55قَالُوا۟ بَشَّرْنَٰكَ بِٱلْحَقِّ فَلَا تَكُن مِّنَ ٱلْقَٰنِطِينَउन्होंने कहा : हमने आपको सच्ची शुभ सूचना दी है। अतः आप निराश होने वालों में से न हों।
  56. 15:56قَالَ وَمَن يَقْنَطُ مِن رَّحْمَةِ رَبِّهِۦٓ إِلَّا ٱلضَّآلُّونَ(इबराहीम अलैहिस्सलाम ने) कहा : और पथभ्रष्टों के सिवा अपने पालनहार की दया से कौन निराश होता है।
  57. 15:57قَالَ فَمَا خَطْبُكُمْ أَيُّهَا ٱلْمُرْسَلُونَउसने कहा : ऐ भेजे हुए फ़रिश्तो! तुम्हारा अभियान क्या है?
  58. 15:58قَالُوٓا۟ إِنَّآ أُرْسِلْنَآ إِلَىٰ قَوْمٍ مُّجْرِمِينَउन्होंने उत्तर दिया : निःसंदेह हम एक अपराधी जाति की ओर भेजे गए हैं।
  59. 15:59إِلَّآ ءَالَ لُوطٍ إِنَّا لَمُنَجُّوهُمْ أَجْمَعِينَलूत के घर वालों के सिवा। निश्चय हम उन सभी को अवश्य बचा लेने वाले हैं।
  60. 15:60إِلَّا ٱمْرَأَتَهُۥ قَدَّرْنَآ ۙ إِنَّهَا لَمِنَ ٱلْغَٰبِرِينَपरंतु लूत की पत्नी, हमने नियत कर दिया है कि निःसंदेह वह निश्चय ही पीछे रह जाने वालों में से है।
  61. 15:61فَلَمَّا جَآءَ ءَالَ لُوطٍ ٱلْمُرْسَلُونَफिर जब लूत के घर वालों के पास भेजे हुए (फ़रिश्ते) आए।
  62. 15:62قَالَ إِنَّكُمْ قَوْمٌ مُّنكَرُونَतो उस (लूत अलैहिस्सलाम) ने कहा : तुम तो अपरिचित लोग हो।
  63. 15:63قَالُوا۟ بَلْ جِئْنَٰكَ بِمَا كَانُوا۟ فِيهِ يَمْتَرُونَउन्होंने कहा : (डरो नहीं) बल्कि हम तुम्हारे पास वह चीज़ लेकर आए हैं, जिसमें वे संदेह किया करते थे।
  64. 15:64وَأَتَيْنَٰكَ بِٱلْحَقِّ وَإِنَّا لَصَٰدِقُونَऔर हम तुम्हारे पास सत्य लेकर आए हैं और निःसंदेह हम निश्चय सच्चे हैं।
  65. 15:65فَأَسْرِ بِأَهْلِكَ بِقِطْعٍ مِّنَ ٱلَّيْلِ وَٱتَّبِعْ أَدْبَٰرَهُمْ وَلَا يَلْتَفِتْ مِنكُمْ أَحَدٌ وَٱمْضُوا۟ حَيْثُ تُؤْمَرُونَअतः तुम अपने घर वालों को लेकर रात के किसी हिस्से में निकल जाओ और खुद उनके पीछे-पीछे चलो। और तुममें से कोई मुड़कर न देखे। तथा चले जाओ, जहाँ तुम्हें आदेश दिया जाता है।
  66. 15:66وَقَضَيْنَآ إِلَيْهِ ذَٰلِكَ ٱلْأَمْرَ أَنَّ دَابِرَ هَٰٓؤُلَآءِ مَقْطُوعٌ مُّصْبِحِينَऔर हमने उसकी ओर इस बात की वह़्य कर दी कि इन लोगों की जड़ सुबह होते ही काट दी जाने वाली है।
  67. 15:67وَجَآءَ أَهْلُ ٱلْمَدِينَةِ يَسْتَبْشِرُونَऔर उस नगर वाले इस हाल में आए कि बहुत खुश हो रहे थे।
  68. 15:68قَالَ إِنَّ هَٰٓؤُلَآءِ ضَيْفِى فَلَا تَفْضَحُونِउस (लूत अलैहिस्सलाम) ने कहा : ये लोग तो मेरे अतिथि हैं। अतः मुझे अपमानित न करो।
  69. 15:69وَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ وَلَا تُخْزُونِतथा अल्लाह से डरो और मुझे अपमानित न करो।
  70. 15:70قَالُوٓا۟ أَوَلَمْ نَنْهَكَ عَنِ ٱلْعَٰلَمِينَउन्होंने कहा : क्या हमने तुम्हें विश्व वासियों (को अतिथि बनाने) से मना नहीं किया?
  71. 15:71قَالَ هَٰٓؤُلَآءِ بَنَاتِىٓ إِن كُنتُمْ فَٰعِلِينَउस (लूत अलैहिस्सलाम) ने कहा : ये मेरी बेटियाँ हैं, यदि तुम कुछ करने वाले हो।
  72. 15:72لَعَمْرُكَ إِنَّهُمْ لَفِى سَكْرَتِهِمْ يَعْمَهُونَऐ नबी! आपकी आयु की क़सम! निःसंदेह वे निश्चय अपनी मस्ती में भटके फिरते थे।
  73. 15:73فَأَخَذَتْهُمُ ٱلصَّيْحَةُ مُشْرِقِينَअंततः सूर्योदय के समय ही चिंघाड़ ने उन्हें पकड़ लिया।
  74. 15:74فَجَعَلْنَا عَٰلِيَهَا سَافِلَهَا وَأَمْطَرْنَا عَلَيْهِمْ حِجَارَةً مِّن سِجِّيلٍफिर हमने उस बस्ती के ऊपरी भाग को नीचे कर दिया और उनपर कंकड़ के पत्थर बरसाए।
  75. 15:75إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لََٔايَٰتٍ لِّلْمُتَوَسِّمِينَनिःसंदेह इसमें सोच-विचार करने वालों के लिए बहुत-सी निशानियाँ हैं।
  76. 15:76وَإِنَّهَا لَبِسَبِيلٍ مُّقِيمٍऔर निःसंदेह वह (बस्ती) एक सार्वजनिक मार्ग पर स्थित है।
  77. 15:77إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لََٔايَةً لِّلْمُؤْمِنِينَनिःसंदेह इसमें ईमान वलों के लिए निश्चय बड़ी निशानी है।
  78. 15:78وَإِن كَانَ أَصْحَٰبُ ٱلْأَيْكَةِ لَظَٰلِمِينَऔर निःसंदेह 'ऐका' वाले निश्चित रूप से अत्याचारी थे।
  79. 15:79فَٱنتَقَمْنَا مِنْهُمْ وَإِنَّهُمَا لَبِإِمَامٍ مُّبِينٍतो हमने उनसे बदला लिया। और निःसंदेह वे दोनों (बस्तियाँ) स्पष्ट मार्ग पर हैं।
  80. 15:80وَلَقَدْ كَذَّبَ أَصْحَٰبُ ٱلْحِجْرِ ٱلْمُرْسَلِينَतथा निःसंदेह ह़िज्र के रहने वालों ने (भी) रसूलों को झुठलाया।
  81. 15:81وَءَاتَيْنَٰهُمْ ءَايَٰتِنَا فَكَانُوا۟ عَنْهَا مُعْرِضِينَऔर हमने उन्हें अपनी निशानियाँ दीं, तो वे उनसे मुँह फेरने वाले थे।
  82. 15:82وَكَانُوا۟ يَنْحِتُونَ مِنَ ٱلْجِبَالِ بُيُوتًا ءَامِنِينَऔर वे निर्भय होकर पर्वतों को काटकर घर बनाते थे।
  83. 15:83فَأَخَذَتْهُمُ ٱلصَّيْحَةُ مُصْبِحِينَअंततः सुबह होते ही उन्हें चिंघाड़ ने पकड़ लिया।
  84. 15:84فَمَآ أَغْنَىٰ عَنْهُم مَّا كَانُوا۟ يَكْسِبُونَफिर उनके किसी काम न आया, जो वे कमाया करते थे।
  85. 15:85وَمَا خَلَقْنَا ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَآ إِلَّا بِٱلْحَقِّ ۗ وَإِنَّ ٱلسَّاعَةَ لََٔاتِيَةٌ ۖ فَٱصْفَحِ ٱلصَّفْحَ ٱلْجَمِيلَऔर हमने आकाशों तथा धरती और उन दोनों के बीच मौजूद सारी चीज़ों को सत्य के साथ पैदा किया है। और निःसंदेह क़ियामत अवश्य आने वाली है। अतः (ऐ नबी!) आप (उन्हें) भले तौर पर क्षमा कर दें।
  86. 15:86إِنَّ رَبَّكَ هُوَ ٱلْخَلَّٰقُ ٱلْعَلِيمُनिःसंदेह आपका पालनहार ही हर चीज़ को पैदा करने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
  87. 15:87وَلَقَدْ ءَاتَيْنَٰكَ سَبْعًا مِّنَ ٱلْمَثَانِى وَٱلْقُرْءَانَ ٱلْعَظِيمَतथा (ऐ नबी!) हमने आपको बार-बार दोहराई जाने वाली सात आयतें और महान क़ुरआन प्रदान किया है।
  88. 15:88لَا تَمُدَّنَّ عَيْنَيْكَ إِلَىٰ مَا مَتَّعْنَا بِهِۦٓ أَزْوَٰجًا مِّنْهُمْ وَلَا تَحْزَنْ عَلَيْهِمْ وَٱخْفِضْ جَنَاحَكَ لِلْمُؤْمِنِينَआप उसकी ओर हरगिज़ न देखें, जो सुख-सामग्री हमने उनमें से विभिन्न प्रकार के लोगों को दे रखी है और न उनपर दुखी हों और ईमान वालों के लिए अपने बाज़ू झुका दें (यानी उनके लिए विनम्र रहें)।
  89. 15:89وَقُلْ إِنِّىٓ أَنَا ٱلنَّذِيرُ ٱلْمُبِينُऔर कह दें कि निःसंदेह मैं तो खुल्लम-खुल्ला डराने वाला हूँ।
  90. 15:90كَمَآ أَنزَلْنَا عَلَى ٱلْمُقْتَسِمِينَजैसे कि हमने (अल्लाह की किताब को) विभाजित करने वालों पर (यातना) उतारी थी।
  91. 15:91ٱلَّذِينَ جَعَلُوا۟ ٱلْقُرْءَانَ عِضِينَजिन्होंने क़ुरआन को खंड-खंड कर दिया।
  92. 15:92فَوَرَبِّكَ لَنَسَْٔلَنَّهُمْ أَجْمَعِينَअतः आपके पालनहार की क़सम! हम उन सबसे अवश्य पूछेंगे।
  93. 15:93عَمَّا كَانُوا۟ يَعْمَلُونَउसके बारे में जो वे किया करते थे।
  94. 15:94فَٱصْدَعْ بِمَا تُؤْمَرُ وَأَعْرِضْ عَنِ ٱلْمُشْرِكِينَअतः आपको जो आदेश दिया जा रहा है, उसका ऐलान कर दें और मुश्रिकों (अनेकेश्वरवादियो) से मुँह फेर लें।
  95. 15:95إِنَّا كَفَيْنَٰكَ ٱلْمُسْتَهْزِءِينَनिःसंदेह हम आपकी ओर से मज़ाक उड़ाने वालों के विरुद्ध काफ़ी हैं।
  96. 15:96ٱلَّذِينَ يَجْعَلُونَ مَعَ ٱللَّهِ إِلَٰهًا ءَاخَرَ ۚ فَسَوْفَ يَعْلَمُونَजो अल्लाह के साथ दूसरा पूज्य बनाते हैं। तो उन्हें जल्द पता चल जाएगा।
  97. 15:97وَلَقَدْ نَعْلَمُ أَنَّكَ يَضِيقُ صَدْرُكَ بِمَا يَقُولُونَऔर निश्चय हम जानते हैं कि उनकी बातों से आपका सीना तंग होता है।
  98. 15:98فَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ وَكُن مِّنَ ٱلسَّٰجِدِينَअतः आप अपने रब की प्रशंसा के साथ उसकी पवित्रता का गान करें और सजदा करने वालों में शामिल हो जाएँ।
  99. 15:99وَٱعْبُدْ رَبَّكَ حَتَّىٰ يَأْتِيَكَ ٱلْيَقِينُऔर अपने रब की इबादत करते रहें, यहाँ तक कि आपके पास यक़ीन (मौत) आ जाए।
सूरह सुनेंMishary Alafasy