70. सूरह अल-मआरिज
The Ascending Stairways
ٱلْمَعَارِج

सूरह अल-मआरिज

The Ascending Stairways
44 आयतेंमक्की

सूरह अल-मआरिज (المعارج, अर्थ: The Ascending Stairways) क़ुरआन की 70वीं सूरह है। यह मक्की सूरह है जिसमें 44 आयतें हैं, और यह पारा 29 में मदनी मुसहफ़ के पृष्ठ 568 से शुरू होती है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
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सूरह अल-मआरिज की सभी आयतें — अरबी और हिंदी अनुवाद

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  1. 70:1سَأَلَ سَآئِلٌۢ بِعَذَابٍ وَاقِعٍएक माँगने वाले ने वह यातना माँगी, जो घटित होने वाली है।
  2. 70:2لِّلْكَٰفِرِينَ لَيْسَ لَهُۥ دَافِعٌकाफ़िरों पर। उसे कोई टालने वाला नहीं।
  3. 70:3مِّنَ ٱللَّهِ ذِى ٱلْمَعَارِجِऊँचाइयों वाले अल्लाह की ओर से।
  4. 70:4تَعْرُجُ ٱلْمَلَٰٓئِكَةُ وَٱلرُّوحُ إِلَيْهِ فِى يَوْمٍ كَانَ مِقْدَارُهُۥ خَمْسِينَ أَلْفَ سَنَةٍफ़रिश्ते और रूह उसकी ओर चढ़ेंगे, एक ऐसे दिन में जिसकी मात्रा पचास हज़ार वर्ष है।
  5. 70:5فَٱصْبِرْ صَبْرًا جَمِيلًاअतः (ऐ नबी!) आप अच्छे धैर्य से काम लें।
  6. 70:6إِنَّهُمْ يَرَوْنَهُۥ بَعِيدًاनिःसंदेह वे उसे दूर समझ रहे हैं।
  7. 70:7وَنَرَىٰهُ قَرِيبًاऔर हम उसे निकट देख रहे हैं।
  8. 70:8يَوْمَ تَكُونُ ٱلسَّمَآءُ كَٱلْمُهْلِजिस दिन आकाश पिघली हुई धातु के समान हो जाएगा।
  9. 70:9وَتَكُونُ ٱلْجِبَالُ كَٱلْعِهْنِऔर पर्वत धुने हुए ऊन के समान हो जाएँगे।
  10. 70:10وَلَا يَسَْٔلُ حَمِيمٌ حَمِيمًاऔर कोई मित्र किसी मित्र को नहीं पूछेगा।
  11. 70:11يُبَصَّرُونَهُمْ ۚ يَوَدُّ ٱلْمُجْرِمُ لَوْ يَفْتَدِى مِنْ عَذَابِ يَوْمِئِذٍۭ بِبَنِيهِहालाँकि वे उन्हें दिखाए जा रहे होंगे। अपराधी चाहेगा कि काश उस दिन की यातना से बचने के लिए छुड़ौती में दे दे अपने बेटों को।
  12. 70:12وَصَٰحِبَتِهِۦ وَأَخِيهِतथा अपनी पत्नी और अपने भाई को।
  13. 70:13وَفَصِيلَتِهِ ٱلَّتِى تُْٔوِيهِतथा अपने परिवार (कुटुंब) को, जो उसे शरण देता था।
  14. 70:14وَمَن فِى ٱلْأَرْضِ جَمِيعًا ثُمَّ يُنجِيهِऔर उन सभी लोगों को जो धरती में हैं। फिर अपने आपको बचा ले।
  15. 70:15كَلَّآ ۖ إِنَّهَا لَظَىٰकदापि नहीं! निःसंदेह वह (जहन्नम) भड़कने वाली आग है।
  16. 70:16نَزَّاعَةً لِّلشَّوَىٰजो खाल उधेड़ देने वाली है।
  17. 70:17تَدْعُوا۟ مَنْ أَدْبَرَ وَتَوَلَّىٰवह उसे पुकारेगी, जिसने पीठ फेरी और मुँह मोड़ा।
  18. 70:18وَجَمَعَ فَأَوْعَىٰٓतथा (धन) एकत्र किया और संभाल कर रखा।
  19. 70:19۞ إِنَّ ٱلْإِنسَٰنَ خُلِقَ هَلُوعًاनिःसंदेह मनुष्य बहुत अधीर बनाया गया है।
  20. 70:20إِذَا مَسَّهُ ٱلشَّرُّ جَزُوعًاजब उसे कष्ट पहुँचता है, तो बहुत घबरा जाने वाला है।
  21. 70:21وَإِذَا مَسَّهُ ٱلْخَيْرُ مَنُوعًاऔर जब उसे भलाई मिलती है, तो बहुत रोकने वाला है।
  22. 70:22إِلَّا ٱلْمُصَلِّينَसिवाय नमाज़ियों के।
  23. 70:23ٱلَّذِينَ هُمْ عَلَىٰ صَلَاتِهِمْ دَآئِمُونَजो हमेशा अपनी नमाज़ों की पाबंदी करते हैं।
  24. 70:24وَٱلَّذِينَ فِىٓ أَمْوَٰلِهِمْ حَقٌّ مَّعْلُومٌऔर जिनके धन में एक निश्चित भाग है।
  25. 70:25لِّلسَّآئِلِ وَٱلْمَحْرُومِमाँगने वाले तथा वंचित के लिए।
  26. 70:26وَٱلَّذِينَ يُصَدِّقُونَ بِيَوْمِ ٱلدِّينِऔर जो बदले के दिन को सत्य मानते हैं।
  27. 70:27وَٱلَّذِينَ هُم مِّنْ عَذَابِ رَبِّهِم مُّشْفِقُونَऔर जो अपने पालनहार की यातना से डरने वाले हैं।
  28. 70:28إِنَّ عَذَابَ رَبِّهِمْ غَيْرُ مَأْمُونٍनिश्चय उनके पालनहार की यातना ऐसी चीज़ है, जिससे निश्चिंत नहीं हुआ जा सकता।
  29. 70:29وَٱلَّذِينَ هُمْ لِفُرُوجِهِمْ حَٰفِظُونَऔर जो अपने गुप्तांगों की रक्षा करते हैं।
  30. 70:30إِلَّا عَلَىٰٓ أَزْوَٰجِهِمْ أَوْ مَا مَلَكَتْ أَيْمَٰنُهُمْ فَإِنَّهُمْ غَيْرُ مَلُومِينَसिवाय अपनी पत्नियों से या अपने स्वामित्व में आई दासियों से, तो निश्चय वे निंदनीय नहीं हैं।
  31. 70:31فَمَنِ ٱبْتَغَىٰ وَرَآءَ ذَٰلِكَ فَأُو۟لَٰٓئِكَ هُمُ ٱلْعَادُونَफिर जो इसके अलावा कुछ और चाहे, तो ऐसे ही लोग सीमा का उल्लंघन करने वाले हैं।
  32. 70:32وَٱلَّذِينَ هُمْ لِأَمَٰنَٰتِهِمْ وَعَهْدِهِمْ رَٰعُونَऔर जो अपनी अमानतों तथा अपनी प्रतिज्ञा का ध्यान रखने वाले हैं।
  33. 70:33وَٱلَّذِينَ هُم بِشَهَٰدَٰتِهِمْ قَآئِمُونَऔर जो अपनी गवाहियों पर क़ायम रहने वाले हैं।
  34. 70:34وَٱلَّذِينَ هُمْ عَلَىٰ صَلَاتِهِمْ يُحَافِظُونَतथा जो अपनी नमाज़ की रक्षा करते हैं।
  35. 70:35أُو۟لَٰٓئِكَ فِى جَنَّٰتٍ مُّكْرَمُونَवही लोग जन्नतों में सम्मानित होंगे।
  36. 70:36فَمَالِ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ قِبَلَكَ مُهْطِعِينَफिर इन काफ़िरों को क्या हुआ है कि वे आपकी ओर दौड़े चले आ रहे है?
  37. 70:37عَنِ ٱلْيَمِينِ وَعَنِ ٱلشِّمَالِ عِزِينَदाएँ से और बाएँ से समूह के समूह।
  38. 70:38أَيَطْمَعُ كُلُّ ٱمْرِئٍ مِّنْهُمْ أَن يُدْخَلَ جَنَّةَ نَعِيمٍक्या उनमें से प्रत्येक व्यक्ति यह लालच रखता है कि उसे नेमत वाली जन्नत में दाखिल किया जाएगा?
  39. 70:39كَلَّآ ۖ إِنَّا خَلَقْنَٰهُم مِّمَّا يَعْلَمُونَकदापि नहीं, निश्चय हमने उन्हें उस चीज़ से पैदा किया है, जिसे वे जानते हैं।
  40. 70:40فَلَآ أُقْسِمُ بِرَبِّ ٱلْمَشَٰرِقِ وَٱلْمَغَٰرِبِ إِنَّا لَقَٰدِرُونَतो मैं क़सम खाता हूँ पूर्वों (सूर्योदय के स्थानों) तथा पश्चिमों (सूर्यास्त के स्थानों) के रब की! निश्चय हम सक्षम हैं।
  41. 70:41عَلَىٰٓ أَن نُّبَدِّلَ خَيْرًا مِّنْهُمْ وَمَا نَحْنُ بِمَسْبُوقِينَकि उनके स्थान पर उनसे उत्तम लोग ले आएँ तथा हम विवश नहीं हैं।
  42. 70:42فَذَرْهُمْ يَخُوضُوا۟ وَيَلْعَبُوا۟ حَتَّىٰ يُلَٰقُوا۟ يَوْمَهُمُ ٱلَّذِى يُوعَدُونَअतः आप उन्हें छोड़ दें कि वे व्यर्थ की बातों में लगे रहें तथा खेलते रहें, यहाँ तक कि उनका सामना उनके उस दिन से हो जाए, जिसका उनसे वादा किया जाता है।
  43. 70:43يَوْمَ يَخْرُجُونَ مِنَ ٱلْأَجْدَاثِ سِرَاعًا كَأَنَّهُمْ إِلَىٰ نُصُبٍ يُوفِضُونَजिस दिन वे क़ब्रों से तेज़ी से बाहर निकलेंगे, जैसे कि वे किसी निशान की ओर दौड़े जा रहे हैं।
  44. 70:44خَٰشِعَةً أَبْصَٰرُهُمْ تَرْهَقُهُمْ ذِلَّةٌ ۚ ذَٰلِكَ ٱلْيَوْمُ ٱلَّذِى كَانُوا۟ يُوعَدُونَउनकी निगाहें झुकी होंगी, उनपर अपमान छाया होगा। यही वह दिन है जिसका उनसे वादा किया जाता था।
सूरह सुनेंMishary Alafasy