53. सूरह अन-नज्म
The Star
ٱلنَّجْم

सूरह अन-नज्म

The Star
62 आयतेंमक्की

सूरह अन-नज्म (النجم, अर्थ: The Star) क़ुरआन की 53वीं सूरह है। यह मक्की सूरह है जिसमें 62 आयतें हैं, और यह पारा 27 में मदनी मुसहफ़ के पृष्ठ 526 से शुरू होती है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
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सूरह अन-नज्म की सभी आयतें — अरबी और हिंदी अनुवाद

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  1. 53:1وَٱلنَّجْمِ إِذَا هَوَىٰक़सम है तारे की जब वह गिरे!
  2. 53:2مَا ضَلَّ صَاحِبُكُمْ وَمَا غَوَىٰतुम्हारा साथी न तो रास्ते से भटका है और न ही गलत रास्ते पर चला है।
  3. 53:3وَمَا يَنطِقُ عَنِ ٱلْهَوَىٰٓऔर न वह अपनी इच्छा से बोलता है।
  4. 53:4إِنْ هُوَ إِلَّا وَحْىٌ يُوحَىٰवह तो केवल वह़्य है, जो उतारी जाती है।
  5. 53:5عَلَّمَهُۥ شَدِيدُ ٱلْقُوَىٰउसे बहुत मज़ूबत शक्तियों वाले (फ़रिश्ते) ने सिखाया है।
  6. 53:6ذُو مِرَّةٍ فَٱسْتَوَىٰजो बड़ा बलशाली है। फिर वह बुलंद हुआ (अपने असली रूप में प्रकट हुआ)।
  7. 53:7وَهُوَ بِٱلْأُفُقِ ٱلْأَعْلَىٰजबकि वह आकाश के सबसे ऊँचे क्षितिज (पूर्वी किनारे) पर था।
  8. 53:8ثُمَّ دَنَا فَتَدَلَّىٰफिर वह निकट हुआ और उतर आया।
  9. 53:9فَكَانَ قَابَ قَوْسَيْنِ أَوْ أَدْنَىٰफिर वह दो धनुषों की दूरी पर था, या उससे भी निकट।
  10. 53:10فَأَوْحَىٰٓ إِلَىٰ عَبْدِهِۦ مَآ أَوْحَىٰफिर उसने अल्लाह के बंदे की ओर वह़्य की, जो भी वह़्य की।
  11. 53:11مَا كَذَبَ ٱلْفُؤَادُ مَا رَأَىٰٓदिल ने झूठ नहीं बोला, जो कुछ उसने देखा।
  12. 53:12أَفَتُمَٰرُونَهُۥ عَلَىٰ مَا يَرَىٰफिर क्या तुम उससे उसपर झगड़ते हो, जो वह देखता है?
  13. 53:13وَلَقَدْ رَءَاهُ نَزْلَةً أُخْرَىٰहालाँकि, निश्चित रूप से उसने उसे एक और बार उतरते हुए भी देखा है।
  14. 53:14عِندَ سِدْرَةِ ٱلْمُنتَهَىٰसिदरतुल-मुनतहा' के पास।
  15. 53:15عِندَهَا جَنَّةُ ٱلْمَأْوَىٰٓउसी के पास 'जन्नतुल मावा' (शाश्वत स्वर्ग) है।
  16. 53:16إِذْ يَغْشَى ٱلسِّدْرَةَ مَا يَغْشَىٰजब सिदरा पर छा रहा था, जो कुछ छा रहा था।
  17. 53:17مَا زَاغَ ٱلْبَصَرُ وَمَا طَغَىٰन निगाह इधर-उधर हुई और न सीमा से आगे बढ़ी।
  18. 53:18لَقَدْ رَأَىٰ مِنْ ءَايَٰتِ رَبِّهِ ٱلْكُبْرَىٰٓनिःसंदेह उसने अपने पालनहार की कुछ बहुत बड़ी निशानियाँ देखीं।
  19. 53:19أَفَرَءَيْتُمُ ٱللَّٰتَ وَٱلْعُزَّىٰफिर क्या तुमने लात और उज़्ज़ा को देखा।
  20. 53:20وَمَنَوٰةَ ٱلثَّالِثَةَ ٱلْأُخْرَىٰٓतथा तीसरी एक और (मूर्ति) मनात को?
  21. 53:21أَلَكُمُ ٱلذَّكَرُ وَلَهُ ٱلْأُنثَىٰक्या तुम्हारे लिए पुत्र हैं और उस (अल्लाह) के लिए पुत्रियाँ?
  22. 53:22تِلْكَ إِذًا قِسْمَةٌ ضِيزَىٰٓतब तो यह बड़ा अन्यायपूर्ण बँटवारा है।
  23. 53:23إِنْ هِىَ إِلَّآ أَسْمَآءٌ سَمَّيْتُمُوهَآ أَنتُمْ وَءَابَآؤُكُم مَّآ أَنزَلَ ٱللَّهُ بِهَا مِن سُلْطَٰنٍ ۚ إِن يَتَّبِعُونَ إِلَّا ٱلظَّنَّ وَمَا تَهْوَى ٱلْأَنفُسُ ۖ وَلَقَدْ جَآءَهُم مِّن رَّبِّهِمُ ٱلْهُدَىٰٓये (मूर्तियाँ) कुछ नामों के सिवा कुछ भी नहीं हैं, जो तुमने तथा तुम्हारे बाप-दादा ने रख लिए हैं। अल्लाह ने इनका कोई प्रमाण नहीं उतारा है। ये लोग केवल अटकल के और उन चीज़ों के पीछे चल रहे हैं जो उनके दिल चाहते हैं। जबकि निःसंदेह उनके पास उनके पालनहार की ओर से मार्गदर्शन आ चुका है।
  24. 53:24أَمْ لِلْإِنسَٰنِ مَا تَمَنَّىٰक्या मनुष्य को वह मिल जाएगा, जिसकी वह कामना करे?
  25. 53:25فَلِلَّهِ ٱلَْٔاخِرَةُ وَٱلْأُولَىٰ(नहीं, ऐसा नहीं है) क्योंकि आख़िरत और दुनिया अल्लाह ही के अधिकार में है।
  26. 53:26۞ وَكَم مِّن مَّلَكٍ فِى ٱلسَّمَٰوَٰتِ لَا تُغْنِى شَفَٰعَتُهُمْ شَئًْا إِلَّا مِنۢ بَعْدِ أَن يَأْذَنَ ٱللَّهُ لِمَن يَشَآءُ وَيَرْضَىٰٓऔर आकाशों में कितने ही फ़रिश्ते हैं कि उनकी सिफ़ारिश कुछ लाभ नहीं देती, परंतु इसके पश्चात कि अल्लाह अनुमति दे जिसके लिए चाहे तथा (जिसे) पसंद करे।
  27. 53:27إِنَّ ٱلَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِٱلَْٔاخِرَةِ لَيُسَمُّونَ ٱلْمَلَٰٓئِكَةَ تَسْمِيَةَ ٱلْأُنثَىٰनिःसंदेह वे लोग जो आख़िरत पर ईमान नहीं रखते, निश्चय वे फ़रिश्तों के नाम औरतों के नामों की तरह रखते हैं।
  28. 53:28وَمَا لَهُم بِهِۦ مِنْ عِلْمٍ ۖ إِن يَتَّبِعُونَ إِلَّا ٱلظَّنَّ ۖ وَإِنَّ ٱلظَّنَّ لَا يُغْنِى مِنَ ٱلْحَقِّ شَئًْاहालाँकि उन्हें इसके बारे में कोई ज्ञान नहीं। वे केवल अनुमान के पीछे चल रहे हैं। और निःसंदेह अनुमान सच्चाई की तुलना में किसी काम नहीं आता।
  29. 53:29فَأَعْرِضْ عَن مَّن تَوَلَّىٰ عَن ذِكْرِنَا وَلَمْ يُرِدْ إِلَّا ٱلْحَيَوٰةَ ٱلدُّنْيَاअतः आप उससे मुँह फेर लें, जिसने हमारी नसीहत से मुँह मोड़ लिया और जिसने दुनिया के जीवन के सिवा कुछ नहीं चाहा।
  30. 53:30ذَٰلِكَ مَبْلَغُهُم مِّنَ ٱلْعِلْمِ ۚ إِنَّ رَبَّكَ هُوَ أَعْلَمُ بِمَن ضَلَّ عَن سَبِيلِهِۦ وَهُوَ أَعْلَمُ بِمَنِ ٱهْتَدَىٰयही उनके ज्ञान की सीमा है। निश्चित रूप से आपका पालनहार ही उसे अधिक जानने वाला है, जो उसके मार्ग से भटक गया और वही उसे भी ज़्यादा जानने वाला है, जो सीधे मार्ग पर चला।
  31. 53:31وَلِلَّهِ مَا فِى ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِى ٱلْأَرْضِ لِيَجْزِىَ ٱلَّذِينَ أَسَُٰٓٔوا۟ بِمَا عَمِلُوا۟ وَيَجْزِىَ ٱلَّذِينَ أَحْسَنُوا۟ بِٱلْحُسْنَىतथा जो कुछ आकाशों में है और जो कुछ धरती में है, सब अल्लाह ही का है, ताकि वह बुराई करने वालों को उनके किए का बदला दे, और भलाई करने वालों को अच्छा बदला दे।
  32. 53:32ٱلَّذِينَ يَجْتَنِبُونَ كَبَٰٓئِرَ ٱلْإِثْمِ وَٱلْفَوَٰحِشَ إِلَّا ٱللَّمَمَ ۚ إِنَّ رَبَّكَ وَٰسِعُ ٱلْمَغْفِرَةِ ۚ هُوَ أَعْلَمُ بِكُمْ إِذْ أَنشَأَكُم مِّنَ ٱلْأَرْضِ وَإِذْ أَنتُمْ أَجِنَّةٌ فِى بُطُونِ أُمَّهَٰتِكُمْ ۖ فَلَا تُزَكُّوٓا۟ أَنفُسَكُمْ ۖ هُوَ أَعْلَمُ بِمَنِ ٱتَّقَىٰٓवे लोग जो बड़े गुनाहों तथा अश्लील कार्यों से दूर रहते हैं, सिवाय कुछ छोटे गुनाहों के। निःसंदेह आपका पालनहार बड़ा क्षमा करने वाला है। वह तुम्हें अधिक जानने वाला है जब उसने तुम्हें धरती से पैदा किया और जब तुम अपनी माँओं के पेटों में बच्चे थे। अतः अपनी पवित्रता का दावा मत करो, वह उसे ज़्यादा जानने वाला है जो वास्तव में परहेज़गार है।
  33. 53:33أَفَرَءَيْتَ ٱلَّذِى تَوَلَّىٰफिर क्या आपने उसे देखा जिसने मुँह फेर लिया?
  34. 53:34وَأَعْطَىٰ قَلِيلًا وَأَكْدَىٰٓऔर थोड़ा-सा दिया फिर रोक लिया।
  35. 53:35أَعِندَهُۥ عِلْمُ ٱلْغَيْبِ فَهُوَ يَرَىٰٓक्या उसके पास परोक्ष का ज्ञान है? अतः वह देख रहा है।
  36. 53:36أَمْ لَمْ يُنَبَّأْ بِمَا فِى صُحُفِ مُوسَىٰया उसे उन बातों की सूचना नहीं दी गई, जो मूसा के ग्रंथों में हैं?
  37. 53:37وَإِبْرَٰهِيمَ ٱلَّذِى وَفَّىٰٓऔर इबराहीम के (ग्रंथों में), जिसने (कर्तव्य) पूरा किया।
  38. 53:38أَلَّا تَزِرُ وَازِرَةٌ وِزْرَ أُخْرَىٰकि कोई बोझ उठाने वाला किसी दूसरे का बोझ नहीं उठाएगा।
  39. 53:39وَأَن لَّيْسَ لِلْإِنسَٰنِ إِلَّا مَا سَعَىٰऔर यह कि मनुष्य के लिए केवल वही है, जिसके लिए उसने प्रयास किया।
  40. 53:40وَأَنَّ سَعْيَهُۥ سَوْفَ يُرَىٰऔर यह कि निश्चय उसका प्रयास शीघ्र ही देखा जाएगा।
  41. 53:41ثُمَّ يُجْزَىٰهُ ٱلْجَزَآءَ ٱلْأَوْفَىٰफिर उसे उसका पूरा प्रतिफल दिया जाएगा।
  42. 53:42وَأَنَّ إِلَىٰ رَبِّكَ ٱلْمُنتَهَىٰऔर यह कि निःसंदेह आपके पालनहार ही की ओर अंततः पहुँचना है।
  43. 53:43وَأَنَّهُۥ هُوَ أَضْحَكَ وَأَبْكَىٰतथा यह कि निःसंदह वही है, जिसने हँसाया तथा रुलाया।
  44. 53:44وَأَنَّهُۥ هُوَ أَمَاتَ وَأَحْيَاतथा यह कि निःसंदेह वही है, जिसने मृत्यु दी और जीवन दिया।
  45. 53:45وَأَنَّهُۥ خَلَقَ ٱلزَّوْجَيْنِ ٱلذَّكَرَ وَٱلْأُنثَىٰऔर यह कि निःसंदेह उसी ने दो प्रकार : नर और मादा पैदा किए।
  46. 53:46مِن نُّطْفَةٍ إِذَا تُمْنَىٰएक बूँद से, जब वह टपकाई जाती है।
  47. 53:47وَأَنَّ عَلَيْهِ ٱلنَّشْأَةَ ٱلْأُخْرَىٰऔर यह कि निःसंदेह उसी के ज़िम्मे दूसरी बार पैदा करना है।
  48. 53:48وَأَنَّهُۥ هُوَ أَغْنَىٰ وَأَقْنَىٰऔर यह कि निःसंदेह उसी ने धनी बनाया और कोष प्रदान किया।
  49. 53:49وَأَنَّهُۥ هُوَ رَبُّ ٱلشِّعْرَىٰऔर यह कि निःसंदेह वही ''शे'रा'' का रब है।
  50. 53:50وَأَنَّهُۥٓ أَهْلَكَ عَادًا ٱلْأُولَىٰऔर यह कि निःसंदेह उसी ने प्रथम 'आद' को विनष्ट किया।
  51. 53:51وَثَمُودَا۟ فَمَآ أَبْقَىٰतथा समूद को, फिर (किसी को) बाक़ी न छोड़ा।
  52. 53:52وَقَوْمَ نُوحٍ مِّن قَبْلُ ۖ إِنَّهُمْ كَانُوا۟ هُمْ أَظْلَمَ وَأَطْغَىٰतथा इनसे पहले नूह़ की जाति को। निःसंदेह वे बहुत ही ज़ालिम और बड़े ही सरकश थे।
  53. 53:53وَٱلْمُؤْتَفِكَةَ أَهْوَىٰऔर उलट जाने वाली बस्ती को उसने उठाकर धरती पर दे मारा।
  54. 53:54فَغَشَّىٰهَا مَا غَشَّىٰतो ढाँप दिया उसे जिस चीज़ से ढाँपा।
  55. 53:55فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكَ تَتَمَارَىٰतो (ऐ इनसान!) तू अपने पालनहार की ने'मतों में से किस-किस में संदेह करेगा?
  56. 53:56هَٰذَا نَذِيرٌ مِّنَ ٱلنُّذُرِ ٱلْأُولَىٰٓयह पहले डराने वालों में से एक डराने वाला है।
  57. 53:57أَزِفَتِ ٱلَْٔازِفَةُनिकट आने वाली निकट आ गई।
  58. 53:58لَيْسَ لَهَا مِن دُونِ ٱللَّهِ كَاشِفَةٌजिसे अल्लाह के सिवा कोई हटाने वाला नहीं।
  59. 53:59أَفَمِنْ هَٰذَا ٱلْحَدِيثِ تَعْجَبُونَतो क्या तुम इस बात पर आश्चर्य करते हो?
  60. 53:60وَتَضْحَكُونَ وَلَا تَبْكُونَतथा हँसते हो और रोते नहीं हो?
  61. 53:61وَأَنتُمْ سَٰمِدُونَतथा तुम ग़ाफ़िल हो!
  62. 53:62فَٱسْجُدُوا۟ لِلَّهِ وَٱعْبُدُوا۟ ۩अतः अल्लाह को सजदा करो और उसी की इबादत करो।
सूरह सुनेंMishary Alafasy