ٱلنَّاس
सूरह अन-नास
Mankind
6 आयतेंमक्की
सूरह अन-नास (الناس, अर्थ: Mankind) क़ुरआन की 114वीं सूरह है। यह मक्की सूरह है जिसमें 6 आयतें हैं, और यह पारा 30 में मदनी मुसहफ़ के पृष्ठ 604 से शुरू होती है।
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
Loading…
सूरह अन-नास की सभी आयतें — अरबी और हिंदी अनुवाद
शब्दार्थ, उच्चारण और तफ़सीर के लिए कोई भी आयत खोलें।
- 114:1قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ ٱلنَّاسِ(ऐ नबी!) कह दीजिए : मैं शरण लेता हूँ लोगों के पालनहार की।
- 114:2مَلِكِ ٱلنَّاسِलोगों के बादशाह की।
- 114:3إِلَٰهِ ٱلنَّاسِलोगों के सत्य पूज्य की।
- 114:4مِن شَرِّ ٱلْوَسْوَاسِ ٱلْخَنَّاسِवसवसा डालने वाले, पीछे हट जाने वाले की बुराई से।
- 114:5ٱلَّذِى يُوَسْوِسُ فِى صُدُورِ ٱلنَّاسِजो लोगों के दिलों में वसवसे डालता है।
- 114:6مِنَ ٱلْجِنَّةِ وَٱلنَّاسِजिन्नों और इनसानों में से।
सूरह सुनेंMishary Alafasy