80. सूरह अ-ब-स
He Frowned
عَبَسَ

सूरह अ-ब-स

He Frowned
42 आयतेंमक्की

सूरह अ-ब-स (عبس, अर्थ: He Frowned) क़ुरआन की 80वीं सूरह है। यह मक्की सूरह है जिसमें 42 आयतें हैं, और यह पारा 30 में मदनी मुसहफ़ के पृष्ठ 585 से शुरू होती है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
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सूरह अ-ब-स की सभी आयतें — अरबी और हिंदी अनुवाद

शब्दार्थ, उच्चारण और तफ़सीर के लिए कोई भी आयत खोलें।
  1. 80:1عَبَسَ وَتَوَلَّىٰٓउस (नबी) ने त्योरी चढ़ाई और मुँह फेर लिया।
  2. 80:2أَن جَآءَهُ ٱلْأَعْمَىٰइस कारण कि उनके पास अंधा आया।
  3. 80:3وَمَا يُدْرِيكَ لَعَلَّهُۥ يَزَّكَّىٰٓऔर आपको क्या मालूम शायद वह पवित्रता प्राप्त कर ले।
  4. 80:4أَوْ يَذَّكَّرُ فَتَنفَعَهُ ٱلذِّكْرَىٰٓया नसीहत ग्रहण करे, तो वह नसीहत उसे लाभ दे।
  5. 80:5أَمَّا مَنِ ٱسْتَغْنَىٰलेकिन जो बेपरवाह हो गया।
  6. 80:6فَأَنتَ لَهُۥ تَصَدَّىٰतो आप उसके पीछे पड़ रहे हैं।
  7. 80:7وَمَا عَلَيْكَ أَلَّا يَزَّكَّىٰहालाँकि आपपर कोई दोष नहीं कि वह पवित्रता ग्रहण नहीं करता।
  8. 80:8وَأَمَّا مَن جَآءَكَ يَسْعَىٰलेकिन जो व्यक्ति आपके पास दौड़ता हुआ आया।
  9. 80:9وَهُوَ يَخْشَىٰऔर वह डर (भी) रहा है।
  10. 80:10فَأَنتَ عَنْهُ تَلَهَّىٰतो आप उसकी ओर ध्यान नहीं देते।
  11. 80:11كَلَّآ إِنَّهَا تَذْكِرَةٌऐसा हरगिज़ नहीं चाहिए, यह (क़ुरआन) तो एक उपदेश है।
  12. 80:12فَمَن شَآءَ ذَكَرَهُۥअतः जो चाहे, उसे याद करे।
  13. 80:13فِى صُحُفٍ مُّكَرَّمَةٍ(यह क़ुरआन) सम्मानित सहीफ़ों (ग्रंथों) में है।
  14. 80:14مَّرْفُوعَةٍ مُّطَهَّرَةٍۭजो उच्च स्थान वाले तथा पवित्र हैं।
  15. 80:15بِأَيْدِى سَفَرَةٍऐसे लिखने वालों (फ़रिश्तों) के हाथों में हैं।
  16. 80:16كِرَامٍۭ بَرَرَةٍजो माननीय और नेक हैं।
  17. 80:17قُتِلَ ٱلْإِنسَٰنُ مَآ أَكْفَرَهُۥसर्वनाश हो मनुष्य का, वह कितना कृतघ्न (नाशुक्रा) है।
  18. 80:18مِنْ أَىِّ شَىْءٍ خَلَقَهُۥ(अल्लाह ने) उसे किस चीज़ से पैदा किया?
  19. 80:19مِن نُّطْفَةٍ خَلَقَهُۥ فَقَدَّرَهُۥएक नुत्फ़े (वीर्य) से उसे पैदा किया, फिर विभिन्न चरणों में उसकी रचना की।
  20. 80:20ثُمَّ ٱلسَّبِيلَ يَسَّرَهُۥफिर उसके लिए रास्ता आसान कर दिया।
  21. 80:21ثُمَّ أَمَاتَهُۥ فَأَقْبَرَهُۥफिर उसे मृत्यु दी, फिर उसे क़ब्र में रखवाया।
  22. 80:22ثُمَّ إِذَا شَآءَ أَنشَرَهُۥफिर जब वह चाहेगा, उसे उठाएगा।
  23. 80:23كَلَّا لَمَّا يَقْضِ مَآ أَمَرَهُۥहरगिज़ नहीं, अभी तक उसने उसे पूरा नहीं किया, जिसका अल्लाह ने उसे आदेश दिया था।
  24. 80:24فَلْيَنظُرِ ٱلْإِنسَٰنُ إِلَىٰ طَعَامِهِۦٓअतः इनसान को चाहिए कि अपने भोजन को देखे।
  25. 80:25أَنَّا صَبَبْنَا ٱلْمَآءَ صَبًّاकि हमने ख़ूब पानी बरसाया।
  26. 80:26ثُمَّ شَقَقْنَا ٱلْأَرْضَ شَقًّاफिर हमने धरती को विशेष रूप से फाड़ा।
  27. 80:27فَأَنۢبَتْنَا فِيهَا حَبًّاफिर हमने उसमें अनाज उगाया।
  28. 80:28وَعِنَبًا وَقَضْبًاतथा अंगूर और (मवेशियों का) चारा।
  29. 80:29وَزَيْتُونًا وَنَخْلًاतथा ज़ैतून और खजूर के पेड़।
  30. 80:30وَحَدَآئِقَ غُلْبًاतथा घने बाग़।
  31. 80:31وَفَٰكِهَةً وَأَبًّاतथा फल और चारा।
  32. 80:32مَّتَٰعًا لَّكُمْ وَلِأَنْعَٰمِكُمْतुम्हारे लिए तथा तुम्हारे पशुओं के लिए जीवन-सामग्री के रूप में।
  33. 80:33فَإِذَا جَآءَتِ ٱلصَّآخَّةُतो जब कानों को बहरा कर देने वाली प्रचंड आवाज़ (क़ियामत) आ जाएगी।
  34. 80:34يَوْمَ يَفِرُّ ٱلْمَرْءُ مِنْ أَخِيهِजिस दिन इनसान अपने भाई से भागेगा।
  35. 80:35وَأُمِّهِۦ وَأَبِيهِतथा अपनी माता और अपने पिता (से)।
  36. 80:36وَصَٰحِبَتِهِۦ وَبَنِيهِतथा अपनी पत्नी और अपने बेटों से।
  37. 80:37لِكُلِّ ٱمْرِئٍ مِّنْهُمْ يَوْمَئِذٍ شَأْنٌ يُغْنِيهِउस दिन उनमें से प्रत्येक व्यक्ति की ऐसी स्थिति होगी, जो उसे (दूसरों से) बेपरवाह कर देगी।
  38. 80:38وُجُوهٌ يَوْمَئِذٍ مُّسْفِرَةٌउस दिन कुछ चेहरे रौशन होंगे।
  39. 80:39ضَاحِكَةٌ مُّسْتَبْشِرَةٌहँसते हुए, प्रसन्न होंगे।
  40. 80:40وَوُجُوهٌ يَوْمَئِذٍ عَلَيْهَا غَبَرَةٌतथा कुछ चेहरों उस दिन धूल से ग्रस्त होंगे।
  41. 80:41تَرْهَقُهَا قَتَرَةٌउनपर कालिमा छाई होगी।
  42. 80:42أُو۟لَٰٓئِكَ هُمُ ٱلْكَفَرَةُ ٱلْفَجَرَةُवही काफ़िर और कुकर्मी लोग हैं।
सूरह सुनेंMishary Alafasy