81. सूरह अत-तकविर
The Overthrowing
ٱلتَّكْوِير

सूरह अत-तकविर

The Overthrowing
29 आयतेंमक्की

सूरह अत-तकविर (التكوير, अर्थ: The Overthrowing) क़ुरआन की 81वीं सूरह है। यह मक्की सूरह है जिसमें 29 आयतें हैं, और यह पारा 30 में मदनी मुसहफ़ के पृष्ठ 586 से शुरू होती है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
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सूरह अत-तकविर की सभी आयतें — अरबी और हिंदी अनुवाद

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  1. 81:1إِذَا ٱلشَّمْسُ كُوِّرَتْजब सूर्य लपेट दिया जाएगा।
  2. 81:2وَإِذَا ٱلنُّجُومُ ٱنكَدَرَتْऔर जब सितारे प्रकाश रहित हो जाएँगे।
  3. 81:3وَإِذَا ٱلْجِبَالُ سُيِّرَتْऔर जब पर्वत चलाए जाएँगे।
  4. 81:4وَإِذَا ٱلْعِشَارُ عُطِّلَتْऔर जब गाभिन ऊँटनियाँ छोड़ दी जाएँगी।
  5. 81:5وَإِذَا ٱلْوُحُوشُ حُشِرَتْऔर जब जंगली जानवर एकत्रित किए जाएँगे।
  6. 81:6وَإِذَا ٱلْبِحَارُ سُجِّرَتْऔर जब सागर भड़काए जाएँगे।
  7. 81:7وَإِذَا ٱلنُّفُوسُ زُوِّجَتْऔर जब प्राण मिला दिए जाएँगे।
  8. 81:8وَإِذَا ٱلْمَوْءُۥدَةُ سُئِلَتْऔर जब जीवित गाड़ी गई लड़की से पूछा जाएगा।
  9. 81:9بِأَىِّ ذَنۢبٍ قُتِلَتْकि वह किस अपराध के कारण मारी गई?
  10. 81:10وَإِذَا ٱلصُّحُفُ نُشِرَتْतथा जब कर्मपत्र (आमाल नामे) फैला दिए जाएँगे।
  11. 81:11وَإِذَا ٱلسَّمَآءُ كُشِطَتْऔर जब आकाश उधेड़ दिया जाएगा।
  12. 81:12وَإِذَا ٱلْجَحِيمُ سُعِّرَتْऔर जब जहन्नम दहकाई जाएगी।
  13. 81:13وَإِذَا ٱلْجَنَّةُ أُزْلِفَتْऔर जब जन्नत क़रीब लाई जाएगी।
  14. 81:14عَلِمَتْ نَفْسٌ مَّآ أَحْضَرَتْतो प्रत्येक प्राणी जान लेगा कि वह क्या लेकर आया है।
  15. 81:15فَلَآ أُقْسِمُ بِٱلْخُنَّسِमैं क़सम खाता हूँ पीछे हटने वाले सितारों की।
  16. 81:16ٱلْجَوَارِ ٱلْكُنَّسِचलने वाले, छिप जाने वाले तारों की।
  17. 81:17وَٱلَّيْلِ إِذَا عَسْعَسَऔर रात की (क़सम), जब वह आती और जाती है।
  18. 81:18وَٱلصُّبْحِ إِذَا تَنَفَّسَतथा सुबह की, जब वह रौशन होने लगे।
  19. 81:19إِنَّهُۥ لَقَوْلُ رَسُولٍ كَرِيمٍनिःसंदेह यह (क़ुरआन) एक आदरणीय संदेशवाहक की लाई हुई वाणी है।
  20. 81:20ذِى قُوَّةٍ عِندَ ذِى ٱلْعَرْشِ مَكِينٍजो शक्तिशाली है, अर्श (सिंहासन) वाले के पास उच्च पद वाला है।
  21. 81:21مُّطَاعٍ ثَمَّ أَمِينٍउसकी वहाँ (आसमानों में) बात मानी जाती है और बड़ा विश्वसनीय है।
  22. 81:22وَمَا صَاحِبُكُم بِمَجْنُونٍऔर तुम्हारा साथी कोई दीवाना नहीं हैं।
  23. 81:23وَلَقَدْ رَءَاهُ بِٱلْأُفُقِ ٱلْمُبِينِऔर निश्चय उन्होंने उस (जिबरील) को स्पष्ट क्षितिज पर देखा है।
  24. 81:24وَمَا هُوَ عَلَى ٱلْغَيْبِ بِضَنِينٍऔर वह परोक्ष (ग़ैब) की बातें बताने में कृपण नहीं हैं।
  25. 81:25وَمَا هُوَ بِقَوْلِ شَيْطَٰنٍ رَّجِيمٍऔर यह (क़ुरआन) किसी धिक्कारे हुए शैतान की वाणी नहीं है।
  26. 81:26فَأَيْنَ تَذْهَبُونَफिर तुम कहाँ जा रहे हो?
  27. 81:27إِنْ هُوَ إِلَّا ذِكْرٌ لِّلْعَٰلَمِينَयह तो समस्त संसार वालों के लिए एक उपदेश है।
  28. 81:28لِمَن شَآءَ مِنكُمْ أَن يَسْتَقِيمَउसके लिए, जो तुममें से सीधे मार्ग पर चलना चाहे।
  29. 81:29وَمَا تَشَآءُونَ إِلَّآ أَن يَشَآءَ ٱللَّهُ رَبُّ ٱلْعَٰلَمِينَतथा तुम कुछ नहीं चाह सकते, सिवाय इसके कि सर्व संसार का पालनहार अल्लाह चाहे।
सूरह सुनेंMishary Alafasy