77. सूरह अल-मुर्सलात
The Emissaries
ٱلْمُرْسَلَات

सूरह अल-मुर्सलात

The Emissaries
50 आयतेंमक्की

सूरह अल-मुर्सलात (المرسلات, अर्थ: The Emissaries) क़ुरआन की 77वीं सूरह है। यह मक्की सूरह है जिसमें 50 आयतें हैं, और यह पारा 29 में मदनी मुसहफ़ के पृष्ठ 580 से शुरू होती है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
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सूरह अल-मुर्सलात की सभी आयतें — अरबी और हिंदी अनुवाद

शब्दार्थ, उच्चारण और तफ़सीर के लिए कोई भी आयत खोलें।
  1. 77:1وَٱلْمُرْسَلَٰتِ عُرْفًاक़सम है उन हवाओं की जो निरंतर भेजी जाती हैं!
  2. 77:2فَٱلْعَٰصِفَٰتِ عَصْفًاफिर बहुत तेज़ चलने वाली हवाओं की क़सम!
  3. 77:3وَٱلنَّٰشِرَٰتِ نَشْرًاऔर बादलों को फैलाने वाली हवाओं की क़सम!
  4. 77:4فَٱلْفَٰرِقَٰتِ فَرْقًاफिर सत्य और असत्य के बीच अंतर करने वाली चीज़ के साथ उतरने वाले फ़रिश्तों की क़सम!
  5. 77:5فَٱلْمُلْقِيَٰتِ ذِكْرًاफिर वह़्य लेकर उतरने वाले फ़रिश्तों की क़सम!
  6. 77:6عُذْرًا أَوْ نُذْرًاउज़्र (बहाना) समाप्त करने या डराने के लिए।
  7. 77:7إِنَّمَا تُوعَدُونَ لَوَٰقِعٌनिःसंदेह तुमसे जिस चीज़ का वादा किया जाता है, निश्चय वह होकर रहने वाली है।
  8. 77:8فَإِذَا ٱلنُّجُومُ طُمِسَتْफिर जब तारे मिटा दिए जाएँगे।
  9. 77:9وَإِذَا ٱلسَّمَآءُ فُرِجَتْऔर जब आकाश फाड़ दिया जाएगा।
  10. 77:10وَإِذَا ٱلْجِبَالُ نُسِفَتْऔर जब पर्वत उड़ा दिए जाएँगे।
  11. 77:11وَإِذَا ٱلرُّسُلُ أُقِّتَتْऔर जब रसूलों को निर्धारित समय पर एकत्र किया जाएगा।
  12. 77:12لِأَىِّ يَوْمٍ أُجِّلَتْकिस दिन के लिए वे विलंबित किए गए हैं?
  13. 77:13لِيَوْمِ ٱلْفَصْلِनिर्णय के दिन के लिए।
  14. 77:14وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا يَوْمُ ٱلْفَصْلِऔर आपको किस चीज़ ने अवगत कराया कि निर्णय का दिन क्या है?
  15. 77:15وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَउस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।
  16. 77:16أَلَمْ نُهْلِكِ ٱلْأَوَّلِينَक्या हमने पहलों को विनष्ट नहीं किया?
  17. 77:17ثُمَّ نُتْبِعُهُمُ ٱلَْٔاخِرِينَफिर हम उनके पीछे बाद वालों को भेजेंगे।
  18. 77:18كَذَٰلِكَ نَفْعَلُ بِٱلْمُجْرِمِينَहम अपराधियों के साथ ऐसा ही करते हैं।
  19. 77:19وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَउस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।
  20. 77:20أَلَمْ نَخْلُقكُّم مِّن مَّآءٍ مَّهِينٍक्या हमने तुम्हें एक तुच्छ पानी से पैदा नहीं किया?
  21. 77:21فَجَعَلْنَٰهُ فِى قَرَارٍ مَّكِينٍफिर हमने उसे एक सुरक्षित ठिकाने में रखा।
  22. 77:22إِلَىٰ قَدَرٍ مَّعْلُومٍएक ज्ञात अवधि तक।
  23. 77:23فَقَدَرْنَا فَنِعْمَ ٱلْقَٰدِرُونَफिर हमने अनुमान लगाया, तो हम क्या ही अच्छा अनुमान लगाने वाले हैं।
  24. 77:24وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَउस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।
  25. 77:25أَلَمْ نَجْعَلِ ٱلْأَرْضَ كِفَاتًاक्या हमने धरती को समेटने वाली नहीं बनाया?
  26. 77:26أَحْيَآءً وَأَمْوَٰتًاजीवित और मृत लोगों को।
  27. 77:27وَجَعَلْنَا فِيهَا رَوَٰسِىَ شَٰمِخَٰتٍ وَأَسْقَيْنَٰكُم مَّآءً فُرَاتًاतथा हमने उसमें ऊँचे पर्वत बनाए और हमने तुम्हें मीठा पानी पिलाया।
  28. 77:28وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَउस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।
  29. 77:29ٱنطَلِقُوٓا۟ إِلَىٰ مَا كُنتُم بِهِۦ تُكَذِّبُونَ(कहा जाएगा :) उस चीज़ की ओर चलो, जिसे तुम झुठलाते थे।
  30. 77:30ٱنطَلِقُوٓا۟ إِلَىٰ ظِلٍّ ذِى ثَلَٰثِ شُعَبٍएक छाया की ओर चलो, जो तीन शाखाओं वाली है।
  31. 77:31لَّا ظَلِيلٍ وَلَا يُغْنِى مِنَ ٱللَّهَبِजो न छाया देगी और न ज्वाला से बचाएगी।
  32. 77:32إِنَّهَا تَرْمِى بِشَرَرٍ كَٱلْقَصْرِनिःसंदेह वह (आग) भवन के समान चिंगारियाँ फेंकेगी।
  33. 77:33كَأَنَّهُۥ جِمَٰلَتٌ صُفْرٌजैसे वे पीले ऊँट हों।
  34. 77:34وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَउस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।
  35. 77:35هَٰذَا يَوْمُ لَا يَنطِقُونَयह वह दिन है कि वे बोल नहीं सकेंगे।
  36. 77:36وَلَا يُؤْذَنُ لَهُمْ فَيَعْتَذِرُونَऔर न उन्हें अनुमति दी जाएगी कि वे उज़्र (कारण) पेश करें।
  37. 77:37وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَउस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।
  38. 77:38هَٰذَا يَوْمُ ٱلْفَصْلِ ۖ جَمَعْنَٰكُمْ وَٱلْأَوَّلِينَयह निर्णय का दिन है। हमने तुम्हें और पहलों को एकत्र कर दिया है।
  39. 77:39فَإِن كَانَ لَكُمْ كَيْدٌ فَكِيدُونِतो यदि तुम्हारे पास कोई चाल हो, तो मेरे विरुद्ध चलो।
  40. 77:40وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَउस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।
  41. 77:41إِنَّ ٱلْمُتَّقِينَ فِى ظِلَٰلٍ وَعُيُونٍनिश्चय डरने वाले लोग छाँवों तथा स्रोतों में होंगे।
  42. 77:42وَفَوَٰكِهَ مِمَّا يَشْتَهُونَतथा फलों में, जिसमें से वे चाहेंगे।
  43. 77:43كُلُوا۟ وَٱشْرَبُوا۟ هَنِيًٓٔۢا بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ(तथा उनसे कहा जाएगा :) मज़े से खाओ और पियो, उसके बदले जो तुम किया करते थे।
  44. 77:44إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْمُحْسِنِينَहम सदाचारियों को इसी तरह बदला प्रदान करते हैं।
  45. 77:45وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَउस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।
  46. 77:46كُلُوا۟ وَتَمَتَّعُوا۟ قَلِيلًا إِنَّكُم مُّجْرِمُونَ(ऐ झुठलाने वालो!) तुम खा लो तथा थोड़ा-सा आनंद ले लो। निश्चय तुम अपराधी हो।
  47. 77:47وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَउस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।
  48. 77:48وَإِذَا قِيلَ لَهُمُ ٱرْكَعُوا۟ لَا يَرْكَعُونَतथा जब उनसे कहा जाता है कि (अल्लाह के आगे) झुको, तो वे नहीं झुकते।
  49. 77:49وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَउस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।
  50. 77:50فَبِأَىِّ حَدِيثٍۭ بَعْدَهُۥ يُؤْمِنُونَफिर इस (क़ुरआन) के बाद वे किस बात पर ईमान लाएँगे?
सूरह सुनेंMishary Alafasy