78. सूरह अन-नबा
The Tidings
ٱلنَّبَأ

सूरह अन-नबा

The Tidings
40 आयतेंमक्की

सूरह अन-नबा (النبإ, अर्थ: The Tidings) क़ुरआन की 78वीं सूरह है। यह मक्की सूरह है जिसमें 40 आयतें हैं, और यह पारा 30 में मदनी मुसहफ़ के पृष्ठ 582 से शुरू होती है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
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सूरह अन-नबा की सभी आयतें — अरबी और हिंदी अनुवाद

शब्दार्थ, उच्चारण और तफ़सीर के लिए कोई भी आयत खोलें।
  1. 78:1عَمَّ يَتَسَآءَلُونَवे आपस में किस चीज़ के विषय में प्रश्न कर रहे हैं?
  2. 78:2عَنِ ٱلنَّبَإِ ٱلْعَظِيمِबहुत बड़ी सूचना के विषय में।
  3. 78:3ٱلَّذِى هُمْ فِيهِ مُخْتَلِفُونَजिसमें वे मतभेद करने वाले हैं।
  4. 78:4كَلَّا سَيَعْلَمُونَहरगिज़ नहीं, शीघ्र ही वे जान लेंगे।
  5. 78:5ثُمَّ كَلَّا سَيَعْلَمُونَफिर हरगिज़ नहीं, शीघ्र ही वे जान लेंगे।
  6. 78:6أَلَمْ نَجْعَلِ ٱلْأَرْضَ مِهَٰدًاक्या हमने धरती को बिछौना नहीं बनाया?
  7. 78:7وَٱلْجِبَالَ أَوْتَادًاऔर पर्वतों को मेखें?
  8. 78:8وَخَلَقْنَٰكُمْ أَزْوَٰجًاतथा हमने तुम्हें जोड़े-जोड़े पैदा किया।
  9. 78:9وَجَعَلْنَا نَوْمَكُمْ سُبَاتًاतथा हमने तुम्हारी नींद को आराम (का साधन) बनाया।
  10. 78:10وَجَعَلْنَا ٱلَّيْلَ لِبَاسًاऔर हमने रात को आवरण बनाया।
  11. 78:11وَجَعَلْنَا ٱلنَّهَارَ مَعَاشًاऔर हमने दिन को कमाने के लिए बनाया।
  12. 78:12وَبَنَيْنَا فَوْقَكُمْ سَبْعًا شِدَادًاतथा हमने तुम्हारे ऊपर सात मज़बूत (आकाश) बनाए।
  13. 78:13وَجَعَلْنَا سِرَاجًا وَهَّاجًاऔर हमने एक प्रकाशमान् तप्त दीप (सूर्य) बनाया।
  14. 78:14وَأَنزَلْنَا مِنَ ٱلْمُعْصِرَٰتِ مَآءً ثَجَّاجًاऔर हमने बदलियों से मूसलाधार पानी उतारा।
  15. 78:15لِّنُخْرِجَ بِهِۦ حَبًّا وَنَبَاتًاताकि हम उसके द्वारा अन्न और वनस्पति उगाएँ।
  16. 78:16وَجَنَّٰتٍ أَلْفَافًاऔर घने-घने बाग़।
  17. 78:17إِنَّ يَوْمَ ٱلْفَصْلِ كَانَ مِيقَٰتًاनिःसंदेह निर्णय (फ़ैसले) का दिन एक नियत समय है।
  18. 78:18يَوْمَ يُنفَخُ فِى ٱلصُّورِ فَتَأْتُونَ أَفْوَاجًاजिस दिन सूर में फूँक मारी जाएगी, तो तुम दल के दल चले आओगे।
  19. 78:19وَفُتِحَتِ ٱلسَّمَآءُ فَكَانَتْ أَبْوَٰبًاऔर आकाश खोल दिया जाएगा, तो उसमें द्वार ही द्वार हो जाएँगे।
  20. 78:20وَسُيِّرَتِ ٱلْجِبَالُ فَكَانَتْ سَرَابًاऔर पर्वत चलाए जाएँगे, तो वे मरीचिका बन जाएँगे।
  21. 78:21إِنَّ جَهَنَّمَ كَانَتْ مِرْصَادًاनिःसंदेह जहन्नम घात में है।
  22. 78:22لِّلطَّٰغِينَ مََٔابًاसरकशों का ठिकाना है।
  23. 78:23لَّٰبِثِينَ فِيهَآ أَحْقَابًاजिसमें वे अनगिनत वर्षों तक रहेंगे।
  24. 78:24لَّا يَذُوقُونَ فِيهَا بَرْدًا وَلَا شَرَابًاवे उसमें न कोई ठंड चखेंगे और न पीने की चीज़।
  25. 78:25إِلَّا حَمِيمًا وَغَسَّاقًاसिवाय अत्यंत गर्म पानी और बहती पीप के।
  26. 78:26جَزَآءً وِفَاقًاयह पूरा-पूरा बदला है।
  27. 78:27إِنَّهُمْ كَانُوا۟ لَا يَرْجُونَ حِسَابًاनिःसंदेह वे हिसाब से नहीं डरते थे।
  28. 78:28وَكَذَّبُوا۟ بَِٔايَٰتِنَا كِذَّابًاतथा उन्होंने हमारी आयतों को बुरी तरह झुठलाया।
  29. 78:29وَكُلَّ شَىْءٍ أَحْصَيْنَٰهُ كِتَٰبًاऔर हमने हर चीज़ को लिखकर संरक्षित कर रखा है।
  30. 78:30فَذُوقُوا۟ فَلَن نَّزِيدَكُمْ إِلَّا عَذَابًاतो चखो, हम तुम्हारे लिए यातना ही अधिक करते रहेंगे।
  31. 78:31إِنَّ لِلْمُتَّقِينَ مَفَازًاनिःसंदेह (अल्लाह से) डरने वालों के लिए सफलता है।
  32. 78:32حَدَآئِقَ وَأَعْنَٰبًاबाग़ तथा अंगूर।
  33. 78:33وَكَوَاعِبَ أَتْرَابًاऔर समान उम्र वाली नवयुवतियाँ।
  34. 78:34وَكَأْسًا دِهَاقًاऔर छलकते हुए प्याले।
  35. 78:35لَّا يَسْمَعُونَ فِيهَا لَغْوًا وَلَا كِذَّٰبًاवे उसमें न तो कोई व्यर्थ बात सुनेंगे और न (एक दूसरे को) झुठलाना।
  36. 78:36جَزَآءً مِّن رَّبِّكَ عَطَآءً حِسَابًاयह तुम्हारे पालनहार की ओर से बदले में ऐसा प्रदान है जो पर्याप्त होगा।
  37. 78:37رَّبِّ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا ٱلرَّحْمَٰنِ ۖ لَا يَمْلِكُونَ مِنْهُ خِطَابًاजो आकाशों और धरती तथा उनके बीच की हर चीज़ का पालनहार है, अत्यंत दयावान् है। उससे बात करने का उन्हें अधिकार नहीं होगा।
  38. 78:38يَوْمَ يَقُومُ ٱلرُّوحُ وَٱلْمَلَٰٓئِكَةُ صَفًّا ۖ لَّا يَتَكَلَّمُونَ إِلَّا مَنْ أَذِنَ لَهُ ٱلرَّحْمَٰنُ وَقَالَ صَوَابًاजिस दिन रूह़ (जिबरील) तथा फ़रिश्ते पंक्तियों में खड़े होंगे, उससे केवल वही बात कर सकेगा जिसे रहमान (अल्लाह) आज्ञा देगा और वह ठीक बात कहेगा।
  39. 78:39ذَٰلِكَ ٱلْيَوْمُ ٱلْحَقُّ ۖ فَمَن شَآءَ ٱتَّخَذَ إِلَىٰ رَبِّهِۦ مََٔابًاयही (वह) दिन है जो सत्य है। अतः जो चाहे अपने पालनहार की ओर लौटने की जगह (ठिकाना) बना ले।
  40. 78:40إِنَّآ أَنذَرْنَٰكُمْ عَذَابًا قَرِيبًا يَوْمَ يَنظُرُ ٱلْمَرْءُ مَا قَدَّمَتْ يَدَاهُ وَيَقُولُ ٱلْكَافِرُ يَٰلَيْتَنِى كُنتُ تُرَٰبًۢاनिःसंदेह हमने तुम्हें एक निकट ही आने वाली यातना से डरा दिया है, जिस दिन मनुष्य देख लेगा, जो कुछ उसके दोनों हाथों ने आगे भेजा है, और काफिर कहेगा : ऐ काश कि मैं मिट्टी होता!
सूरह सुनेंMishary Alafasy