73. सूरह अल-मुज्जम्मिल
The Enshrouded One
ٱلْمُزَّمِّل

सूरह अल-मुज्जम्मिल

The Enshrouded One
20 आयतेंमक्की

सूरह अल-मुज्जम्मिल (المزمل, अर्थ: The Enshrouded One) क़ुरआन की 73वीं सूरह है। यह मक्की सूरह है जिसमें 20 आयतें हैं, और यह पारा 29 में मदनी मुसहफ़ के पृष्ठ 574 से शुरू होती है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
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सूरह अल-मुज्जम्मिल की सभी आयतें — अरबी और हिंदी अनुवाद

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  1. 73:1يَٰٓأَيُّهَا ٱلْمُزَّمِّلُऐ कपड़े में लिपटने वाले!
  2. 73:2قُمِ ٱلَّيْلَ إِلَّا قَلِيلًاरात्रि के समय (नमाज़ में) खड़े रहें, सिवाय उसके थोड़े भाग के।
  3. 73:3نِّصْفَهُۥٓ أَوِ ٱنقُصْ مِنْهُ قَلِيلًاआधी रात (नमाज़ पढ़ें) अथवा उससे थोड़ा-सा कम कर लें।
  4. 73:4أَوْ زِدْ عَلَيْهِ وَرَتِّلِ ٱلْقُرْءَانَ تَرْتِيلًاया उससे कुछ अधिक कर लें। और क़ुरआन को ठहर-ठहर कर पढ़ें।
  5. 73:5إِنَّا سَنُلْقِى عَلَيْكَ قَوْلًا ثَقِيلًاनिश्चय हम आपपर (ऐ नबी!) एक भारी वाणी (क़ुरआन) उतारेंगे।
  6. 73:6إِنَّ نَاشِئَةَ ٱلَّيْلِ هِىَ أَشَدُّ وَطًْٔا وَأَقْوَمُ قِيلًاनिःसंदेह रात की इबादत हृदय में अधिक प्रभावी होती है और बात के लिए अधिक उपयुक्त होती है।
  7. 73:7إِنَّ لَكَ فِى ٱلنَّهَارِ سَبْحًا طَوِيلًاनिःसंदेह आपके लिए दिन में बहुत-से कार्य हैं।
  8. 73:8وَٱذْكُرِ ٱسْمَ رَبِّكَ وَتَبَتَّلْ إِلَيْهِ تَبْتِيلًاऔर अपने पालनहार के नाम का स्मरण करें और सबसे अलग होकर उसी की ओर ध्यान आकर्षित कर लें।
  9. 73:9رَّبُّ ٱلْمَشْرِقِ وَٱلْمَغْرِبِ لَآ إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ فَٱتَّخِذْهُ وَكِيلًاवह पूर्व तथा पश्चिम का पालनहार है। उसके सिवा कोई पूज्य नहीं। अतः तुम उसी को अपना कार्यसाधक बना लो।
  10. 73:10وَٱصْبِرْ عَلَىٰ مَا يَقُولُونَ وَٱهْجُرْهُمْ هَجْرًا جَمِيلًاऔर जो कुछ वे कह रहे हैं, उसपर धैर्य से काम लें और उन्हें अच्छे ढंग से छोड़ दें।
  11. 73:11وَذَرْنِى وَٱلْمُكَذِّبِينَ أُو۟لِى ٱلنَّعْمَةِ وَمَهِّلْهُمْ قَلِيلًاतथा मुझे और इन झुठलाने वाले संपन्न लोगों को छोड़ दें और उन्हें थोड़ी-सी मोहलत दें।
  12. 73:12إِنَّ لَدَيْنَآ أَنكَالًا وَجَحِيمًاनिःसंदेह हमारे पास बेड़ियाँ हैं तथा भड़कती हुई आग।
  13. 73:13وَطَعَامًا ذَا غُصَّةٍ وَعَذَابًا أَلِيمًاऔर गले में फँस जाने वाला भोजन तथा दर्दनाक यातना है।
  14. 73:14يَوْمَ تَرْجُفُ ٱلْأَرْضُ وَٱلْجِبَالُ وَكَانَتِ ٱلْجِبَالُ كَثِيبًا مَّهِيلًاजिस दिन धरती और पर्वत काँप उठेंगे तथा पर्वत गिराई हुई रेत के ढेर हो जाएँगे।
  15. 73:15إِنَّآ أَرْسَلْنَآ إِلَيْكُمْ رَسُولًا شَٰهِدًا عَلَيْكُمْ كَمَآ أَرْسَلْنَآ إِلَىٰ فِرْعَوْنَ رَسُولًاनिःसंदेह हमने तुम्हारी ओर एक रसूल भेजा, जो तुमपर गवाही देने वाला है, जिस प्रकार हमने फ़िरऔन की ओर एक रसूल भेजा।
  16. 73:16فَعَصَىٰ فِرْعَوْنُ ٱلرَّسُولَ فَأَخَذْنَٰهُ أَخْذًا وَبِيلًاचुनाँचे फ़िरऔन ने उस रसूल की अवज्ञा की, तो हमने उसकी बड़ी सख़्त पकड़ की।
  17. 73:17فَكَيْفَ تَتَّقُونَ إِن كَفَرْتُمْ يَوْمًا يَجْعَلُ ٱلْوِلْدَٰنَ شِيبًاफिर तुम कैसे बचोगे, यदि तुमने कुफ्र किया, उस दिन से जो बच्चों को बूढ़े कर देगा?
  18. 73:18ٱلسَّمَآءُ مُنفَطِرٌۢ بِهِۦ ۚ كَانَ وَعْدُهُۥ مَفْعُولًاउस दिन आकाश फट जाएगा। उसका वादा पूरा होकर रहेगा।
  19. 73:19إِنَّ هَٰذِهِۦ تَذْكِرَةٌ ۖ فَمَن شَآءَ ٱتَّخَذَ إِلَىٰ رَبِّهِۦ سَبِيلًاनिश्चय यह एक उपदेश है। अतः जो चाहे अपने पालनहार की ओर रास्ता बना ले।
  20. 73:20۞ إِنَّ رَبَّكَ يَعْلَمُ أَنَّكَ تَقُومُ أَدْنَىٰ مِن ثُلُثَىِ ٱلَّيْلِ وَنِصْفَهُۥ وَثُلُثَهُۥ وَطَآئِفَةٌ مِّنَ ٱلَّذِينَ مَعَكَ ۚ وَٱللَّهُ يُقَدِّرُ ٱلَّيْلَ وَٱلنَّهَارَ ۚ عَلِمَ أَن لَّن تُحْصُوهُ فَتَابَ عَلَيْكُمْ ۖ فَٱقْرَءُوا۟ مَا تَيَسَّرَ مِنَ ٱلْقُرْءَانِ ۚ عَلِمَ أَن سَيَكُونُ مِنكُم مَّرْضَىٰ ۙ وَءَاخَرُونَ يَضْرِبُونَ فِى ٱلْأَرْضِ يَبْتَغُونَ مِن فَضْلِ ٱللَّهِ ۙ وَءَاخَرُونَ يُقَٰتِلُونَ فِى سَبِيلِ ٱللَّهِ ۖ فَٱقْرَءُوا۟ مَا تَيَسَّرَ مِنْهُ ۚ وَأَقِيمُوا۟ ٱلصَّلَوٰةَ وَءَاتُوا۟ ٱلزَّكَوٰةَ وَأَقْرِضُوا۟ ٱللَّهَ قَرْضًا حَسَنًا ۚ وَمَا تُقَدِّمُوا۟ لِأَنفُسِكُم مِّنْ خَيْرٍ تَجِدُوهُ عِندَ ٱللَّهِ هُوَ خَيْرًا وَأَعْظَمَ أَجْرًا ۚ وَٱسْتَغْفِرُوا۟ ٱللَّهَ ۖ إِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌۢनिःसंदेह आपका पालनहार जानता है कि आप (तहज्जुद की नमाज़ में) रात के दो-तिहाई भाग से कुछ कम तथा उसका आधा भाग और उसका एक-तिहाई भाग खड़े होते हैं। तथा आपके साथियों का एक समूह भी (ऐसा करता है)। और अल्लाह ही रात तथा दिन का अनुमान रखता है। उसने जान लिया कि तुम हरगिज़ उसकी क्षमता नहीं रखोगे। अतः उसने तुमपर दया की। अतः क़ुरआन में से जो आसान हो, पढ़ो। वह जानता है कि निश्चय तुममें से कुछ लोग बीमार होंगे और कुछ अन्य लोग धरती में यात्रा करेंगे, अल्लाह का अनुग्रह तलाश करेंगे और कुछ दूसरे लोग अल्लाह की राह में युद्ध करेंगे। अतः उसमें से जो आसान हो, पढ़ो। तथा नमाज़ क़ायम करो और ज़कात दो और अल्लाह को उत्तम ऋण दो। तथा तुम अपने लिए जो भी भलाई आगे भेजोगे, उसे अल्लाह के पास अति उत्तम और बदले की दृष्टि से बढ़कर पाओगे। और अल्लाह से क्षमा याचना करो। निःसंदेह अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
सूरह सुनेंMishary Alafasy