74. सूरह अल-मुद्दस्सिर
The Cloaked One
ٱلْمُدَّثِّر

सूरह अल-मुद्दस्सिर

The Cloaked One
56 आयतेंमक्की

सूरह अल-मुद्दस्सिर (المدثر, अर्थ: The Cloaked One) क़ुरआन की 74वीं सूरह है। यह मक्की सूरह है जिसमें 56 आयतें हैं, और यह पारा 29 में मदनी मुसहफ़ के पृष्ठ 575 से शुरू होती है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
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सूरह अल-मुद्दस्सिर की सभी आयतें — अरबी और हिंदी अनुवाद

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  1. 74:1يَٰٓأَيُّهَا ٱلْمُدَّثِّرُऐ कपड़े में लिपटने वाले!
  2. 74:2قُمْ فَأَنذِرْखड़े हो जाओ, फिर सावधान करो।
  3. 74:3وَرَبَّكَ فَكَبِّرْतथा अपने पालनहार ही की महिमा का वर्णन करो।
  4. 74:4وَثِيَابَكَ فَطَهِّرْतथा अपने कपड़े को पवित्र रखो।
  5. 74:5وَٱلرُّجْزَ فَٱهْجُرْऔर गंदगी (बुतों) से दूर रहो।
  6. 74:6وَلَا تَمْنُن تَسْتَكْثِرُतथा उपकार न जताओ (अपनी नेकियों को) अधिक समझ कर।
  7. 74:7وَلِرَبِّكَ فَٱصْبِرْऔर अपने पालनहार ही के लिए धैर्य से काम लो।
  8. 74:8فَإِذَا نُقِرَ فِى ٱلنَّاقُورِफिर जब सूर में फूँक मारी जाएगी।
  9. 74:9فَذَٰلِكَ يَوْمَئِذٍ يَوْمٌ عَسِيرٌतो वह दिन अति भीषण दिन होगा।
  10. 74:10عَلَى ٱلْكَٰفِرِينَ غَيْرُ يَسِيرٍकाफ़िरों पर आसान न होगा।
  11. 74:11ذَرْنِى وَمَنْ خَلَقْتُ وَحِيدًاआप मुझे और उसे छोड़ दें, जिसे मैंने अकेला पैदा किया।
  12. 74:12وَجَعَلْتُ لَهُۥ مَالًا مَّمْدُودًاऔर मैंने उसे बहुत सारा धन प्रदान किया।
  13. 74:13وَبَنِينَ شُهُودًاऔर उपस्थित रहने वाले बेटे दिए।
  14. 74:14وَمَهَّدتُّ لَهُۥ تَمْهِيدًاऔर मैंने उसे प्रत्येक प्रकार का संसाधन दिया।
  15. 74:15ثُمَّ يَطْمَعُ أَنْ أَزِيدَफिर वह लोभ रखता है कि मैं उसे और अधिक दूँ।
  16. 74:16كَلَّآ ۖ إِنَّهُۥ كَانَ لَِٔايَٰتِنَا عَنِيدًاकदापि नहीं! निश्चय वह हमारी आयतों का सख़्त विरोधी है।
  17. 74:17سَأُرْهِقُهُۥ صَعُودًاशीघ्र ही मैं उसे एक कठोर चढ़ाई चढ़ाऊँगा।
  18. 74:18إِنَّهُۥ فَكَّرَ وَقَدَّرَनिःसंदेह उसने सोच-विचार किया और बात बनाई।
  19. 74:19فَقُتِلَ كَيْفَ قَدَّرَतो वह मारा जाए! उसने कैसी कैसी बात बनाई?
  20. 74:20ثُمَّ قُتِلَ كَيْفَ قَدَّرَफिर मारा जाए! उसने कैसी बात बनाई?
  21. 74:21ثُمَّ نَظَرَफिर उसने देखा।
  22. 74:22ثُمَّ عَبَسَ وَبَسَرَफिर उसने त्योरी चढ़ाई और मुँह बनाया।
  23. 74:23ثُمَّ أَدْبَرَ وَٱسْتَكْبَرَफिर उसने पीठ फेरी और घमंड किया।
  24. 74:24فَقَالَ إِنْ هَٰذَآ إِلَّا سِحْرٌ يُؤْثَرُफिर उसने कहा : यह तो मात्र एक जादू है, जो (पहलों से) नक़ल (उद्धृत) किया जाता है।
  25. 74:25إِنْ هَٰذَآ إِلَّا قَوْلُ ٱلْبَشَرِयह तो मात्र मनुष्य की वाणी है।
  26. 74:26سَأُصْلِيهِ سَقَرَमैं उसे शीघ्र ही 'सक़र' (जहन्नम) में झोंक दूँगा।
  27. 74:27وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا سَقَرُऔर आपको किस चीज़ ने अवगत कराया कि 'सक़र' (जहन्नम) क्या है?
  28. 74:28لَا تُبْقِى وَلَا تَذَرُवह न शेष रखेगी और न छोड़ेगी।
  29. 74:29لَوَّاحَةٌ لِّلْبَشَرِवह खाल को झुलस देने वाली है।
  30. 74:30عَلَيْهَا تِسْعَةَ عَشَرَउसपर उन्नीस (फ़रिश्ते) नियुक्त हैं।
  31. 74:31وَمَا جَعَلْنَآ أَصْحَٰبَ ٱلنَّارِ إِلَّا مَلَٰٓئِكَةً ۙ وَمَا جَعَلْنَا عِدَّتَهُمْ إِلَّا فِتْنَةً لِّلَّذِينَ كَفَرُوا۟ لِيَسْتَيْقِنَ ٱلَّذِينَ أُوتُوا۟ ٱلْكِتَٰبَ وَيَزْدَادَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا۟ إِيمَٰنًا ۙ وَلَا يَرْتَابَ ٱلَّذِينَ أُوتُوا۟ ٱلْكِتَٰبَ وَٱلْمُؤْمِنُونَ ۙ وَلِيَقُولَ ٱلَّذِينَ فِى قُلُوبِهِم مَّرَضٌ وَٱلْكَٰفِرُونَ مَاذَآ أَرَادَ ٱللَّهُ بِهَٰذَا مَثَلًا ۚ كَذَٰلِكَ يُضِلُّ ٱللَّهُ مَن يَشَآءُ وَيَهْدِى مَن يَشَآءُ ۚ وَمَا يَعْلَمُ جُنُودَ رَبِّكَ إِلَّا هُوَ ۚ وَمَا هِىَ إِلَّا ذِكْرَىٰ لِلْبَشَرِऔर हमने जहन्नम के रक्षक फ़रिश्ते ही बनाए हैं और उनकी संख्या को काफ़िरों के लिए परीक्षण बनाया है। ताकि अह्ले किताब विश्वास कर लें और ईमान वाले ईमान में आगे बढ़ जाएँ। और किताब वाले एवं ईमान वाले किसी संदेह में न पड़ें। और ताकि वे लोग जिनके दिलों में रोग है और वे लोग जो काफ़िर हैं, यह कहें कि इस उदाहरण से अल्लाह का क्या तात्पर्य है? ऐसे ही, अल्लाह जिसे चाहता है गुमराह करता है और जिसे चाहता है सीधा मार्ग दिखाता है। और आपके पालनहार की सेनाओं को उसके सिवा कोई नहीं जानता। और यह तो केवल मनुष्य के लिए उपदेश है।
  32. 74:32كَلَّا وَٱلْقَمَرِकदापि नहीं, क़सम है चाँद की!
  33. 74:33وَٱلَّيْلِ إِذْ أَدْبَرَतथा रात की, जब वह जाने लगे!
  34. 74:34وَٱلصُّبْحِ إِذَآ أَسْفَرَऔर सुबह की, जब वह प्रकाशित हो जाए!
  35. 74:35إِنَّهَا لَإِحْدَى ٱلْكُبَرِनिःसंदेह वह (जहन्नम) निश्चय बहुत बड़ी चीज़ों में से एक है।
  36. 74:36نَذِيرًا لِّلْبَشَرِमनुष्य के लिए डराने वाली है।
  37. 74:37لِمَن شَآءَ مِنكُمْ أَن يَتَقَدَّمَ أَوْ يَتَأَخَّرَतुम में से उसके लिए, जो आगे बढ़ना चाहे अथवा पीछे हटना चाहे।
  38. 74:38كُلُّ نَفْسٍۭ بِمَا كَسَبَتْ رَهِينَةٌप्रत्येक व्यक्ति उसके बदले जो उसने कमाया, गिरवी रखा हुआ है।
  39. 74:39إِلَّآ أَصْحَٰبَ ٱلْيَمِينِसिवाय दाहिने वालों के।
  40. 74:40فِى جَنَّٰتٍ يَتَسَآءَلُونَवे जन्नतों में एक-दूसरे से पूछेंगे।
  41. 74:41عَنِ ٱلْمُجْرِمِينَअपराधियों के बारे में।
  42. 74:42مَا سَلَكَكُمْ فِى سَقَرَतुम्हें किस चीज़ ने जहन्नम में डाला?
  43. 74:43قَالُوا۟ لَمْ نَكُ مِنَ ٱلْمُصَلِّينَवे कहेंगे : हम नमाज़ पढ़ने वालों में से न थे।
  44. 74:44وَلَمْ نَكُ نُطْعِمُ ٱلْمِسْكِينَऔर न हम निर्धन को खाना खिलाते थे।
  45. 74:45وَكُنَّا نَخُوضُ مَعَ ٱلْخَآئِضِينَऔर हम बेहूदा बहस करने वालों के साथ मिलकर व्यर्थ बहस किया करते थे।
  46. 74:46وَكُنَّا نُكَذِّبُ بِيَوْمِ ٱلدِّينِऔर हम बदले के दिन को झुठलाया करते थे।
  47. 74:47حَتَّىٰٓ أَتَىٰنَا ٱلْيَقِينُयहाँ तक कि मौत हमारे पास आ गई।
  48. 74:48فَمَا تَنفَعُهُمْ شَفَٰعَةُ ٱلشَّٰفِعِينَतो उन्हें सिफ़ारिश करने वालों की सिफ़ारिश लाभ नहीं देगी।
  49. 74:49فَمَا لَهُمْ عَنِ ٱلتَّذْكِرَةِ مُعْرِضِينَतो उन्हें क्या हो गया है कि उपदेश से मुँह फेर रहे हैं?
  50. 74:50كَأَنَّهُمْ حُمُرٌ مُّسْتَنفِرَةٌजैसे वे सख़्त बिदकने वाले गधे हैं।
  51. 74:51فَرَّتْ مِن قَسْوَرَةٍۭजो शेर से भागे हैं।
  52. 74:52بَلْ يُرِيدُ كُلُّ ٱمْرِئٍ مِّنْهُمْ أَن يُؤْتَىٰ صُحُفًا مُّنَشَّرَةًबल्कि उनमें से प्रत्येक व्यक्ति चाहता है कि उसे खुली पुस्तकें दी जाएँ।
  53. 74:53كَلَّا ۖ بَل لَّا يَخَافُونَ ٱلَْٔاخِرَةَऐसा कदापि नहीं हो सकता, बल्कि वे आख़िरत से नहीं डरते।
  54. 74:54كَلَّآ إِنَّهُۥ تَذْكِرَةٌहरगिज़ नहीं, निश्चय यह (क़ुरआन) एक उपदेश (याददेहानी) है।
  55. 74:55فَمَن شَآءَ ذَكَرَهُۥअतः जो चाहे, उससे नसीहत प्राप्त करे।
  56. 74:56وَمَا يَذْكُرُونَ إِلَّآ أَن يَشَآءَ ٱللَّهُ ۚ هُوَ أَهْلُ ٱلتَّقْوَىٰ وَأَهْلُ ٱلْمَغْفِرَةِऔर वे नसीहत प्राप्त नहीं कर सकते, परंतु यह कि अल्लाह चाहे। वही इस योग्य है कि उससे डरा जाए और वही इस योग्य है कि क्षमा करे।
सूरह सुनेंMishary Alafasy