ٱلْقِيَامَة
सूरह अल-कियामह
The Resurrection
40 आयतेंमक्की
सूरह अल-कियामह (القيامة, अर्थ: The Resurrection) क़ुरआन की 75वीं सूरह है। यह मक्की सूरह है जिसमें 40 आयतें हैं, और यह पारा 29 में मदनी मुसहफ़ के पृष्ठ 577 से शुरू होती है।
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
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सूरह अल-कियामह की सभी आयतें — अरबी और हिंदी अनुवाद
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- 75:1لَآ أُقْسِمُ بِيَوْمِ ٱلْقِيَٰمَةِमैं क़सम खाता हूँ क़ियामत के दिन की।
- 75:2وَلَآ أُقْسِمُ بِٱلنَّفْسِ ٱللَّوَّامَةِतथा मैं क़सम खाता हूँ निंदा करने वाली अंतरात्मा की।
- 75:3أَيَحْسَبُ ٱلْإِنسَٰنُ أَلَّن نَّجْمَعَ عِظَامَهُۥक्या इनसान समझता है कि हम कभी उसकी हड्डियों को एकत्र नहीं करेंगे?
- 75:4بَلَىٰ قَٰدِرِينَ عَلَىٰٓ أَن نُّسَوِّىَ بَنَانَهُۥक्यों नहीं? हम इस बता का भी सामर्थ्य रखते हैं कि उसकी उंगलियों की पोर-पोर सीधी कर दें।
- 75:5بَلْ يُرِيدُ ٱلْإِنسَٰنُ لِيَفْجُرَ أَمَامَهُۥबल्कि मनुष्य चाहता है कि अपने आगे भी गुनाह करता रहे।
- 75:6يَسَْٔلُ أَيَّانَ يَوْمُ ٱلْقِيَٰمَةِवह पूछता है कि क़ियामत का दिन कब होगा?
- 75:7فَإِذَا بَرِقَ ٱلْبَصَرُतो जब आँख चौंधिया जाएगी।
- 75:8وَخَسَفَ ٱلْقَمَرُऔर चाँद को ग्रहण लग जाएगा।
- 75:9وَجُمِعَ ٱلشَّمْسُ وَٱلْقَمَرُऔर सूर्य और चाँद एकत्र कर दिए जाएँगे।
- 75:10يَقُولُ ٱلْإِنسَٰنُ يَوْمَئِذٍ أَيْنَ ٱلْمَفَرُّउस दिन मनुष्य कहेगा कि भागने का स्थान कहाँ है?
- 75:11كَلَّا لَا وَزَرَकदापि नहीं, शरण लेने का स्थान कोई नहीं।
- 75:12إِلَىٰ رَبِّكَ يَوْمَئِذٍ ٱلْمُسْتَقَرُّउस दिन तेरे पालनहार ही की ओर लौटकर जाना है।
- 75:13يُنَبَّؤُا۟ ٱلْإِنسَٰنُ يَوْمَئِذٍۭ بِمَا قَدَّمَ وَأَخَّرَउस दिन इनसान को बताया जाएगा जो उसने आगे भेजा और जो पीछे छोड़ा।
- 75:14بَلِ ٱلْإِنسَٰنُ عَلَىٰ نَفْسِهِۦ بَصِيرَةٌबल्कि इनसान स्वयं अपने विरुद्ध गवाह है।
- 75:15وَلَوْ أَلْقَىٰ مَعَاذِيرَهُۥअगरचे वह अपने बहाने पेश करे।
- 75:16لَا تُحَرِّكْ بِهِۦ لِسَانَكَ لِتَعْجَلَ بِهِۦٓ(ऐ नबी!) आप इसके साथ अपनी ज़ुबान न हिलाएँ, ताकि इसे शीघ्र याद कर लें।
- 75:17إِنَّ عَلَيْنَا جَمْعَهُۥ وَقُرْءَانَهُۥनिःसंदेह उसको एकत्र करना और (आपका) उसे पढ़ना हमारे ज़िम्मे है।
- 75:18فَإِذَا قَرَأْنَٰهُ فَٱتَّبِعْ قُرْءَانَهُۥअतः जब हम उसे पढ़ लें, तो आप उसके पठन का अनुसरण करें।
- 75:19ثُمَّ إِنَّ عَلَيْنَا بَيَانَهُۥफिर निःसंदेह उसे स्पषट करना हमारे ही ज़िम्मे है।
- 75:20كَلَّا بَلْ تُحِبُّونَ ٱلْعَاجِلَةَकदापि नहीं, बल्कि तुम शीघ्र प्राप्त होने वाली चीज़ (संसार) से प्रेम करते हो।
- 75:21وَتَذَرُونَ ٱلَْٔاخِرَةَऔर बाद में आने वाली (आख़िरत) को छोड़ देते हो।
- 75:22وُجُوهٌ يَوْمَئِذٍ نَّاضِرَةٌउस दिन कई चेहरे तरो-ताज़ा होंगे।
- 75:23إِلَىٰ رَبِّهَا نَاظِرَةٌअपने पालनहार की ओर देख रहे होंगे।
- 75:24وَوُجُوهٌ يَوْمَئِذٍۭ بَاسِرَةٌऔर कई चेहरे उस दिन बिगड़े हुए होंगे।
- 75:25تَظُنُّ أَن يُفْعَلَ بِهَا فَاقِرَةٌउन्हें विश्वास होगा कि उनके साथ कमड़ तोड़ देने वाली सख्ती की जाएगी।
- 75:26كَلَّآ إِذَا بَلَغَتِ ٱلتَّرَاقِىَकदापि नहीं, जब प्राण हँसलियों तक पहुँच जाएगा।
- 75:27وَقِيلَ مَنْ ۜ رَاقٍऔर कहा जाएगा : कौन है झाड़-फूँक करने वाला?
- 75:28وَظَنَّ أَنَّهُ ٱلْفِرَاقُऔर उसे विश्वास हो जाएगा कि यह (संसार से) जुदाई का समय है।
- 75:29وَٱلْتَفَّتِ ٱلسَّاقُ بِٱلسَّاقِऔर पिंडली, पिंडली के साथ लिपट जाएगी।
- 75:30إِلَىٰ رَبِّكَ يَوْمَئِذٍ ٱلْمَسَاقُउस दिन तेरे पालनहार ही की ओर जाना है।
- 75:31فَلَا صَدَّقَ وَلَا صَلَّىٰतो न उसने (सत्य को) माना और न नमाज़ पढ़ी।
- 75:32وَلَٰكِن كَذَّبَ وَتَوَلَّىٰलेकिन उसने झुठलाया तथा मुँह फेरा।
- 75:33ثُمَّ ذَهَبَ إِلَىٰٓ أَهْلِهِۦ يَتَمَطَّىٰٓफिर अकड़ता हुआ अपने परिजनों की ओर गया।
- 75:34أَوْلَىٰ لَكَ فَأَوْلَىٰतेरे लिए विनाश है, फिर तेरे लिए बर्बादी है।
- 75:35ثُمَّ أَوْلَىٰ لَكَ فَأَوْلَىٰٓफिर तेरे लिए विनाश है, फिर तेरे लिए बर्बादी है।
- 75:36أَيَحْسَبُ ٱلْإِنسَٰنُ أَن يُتْرَكَ سُدًىक्या इनसान समझता है कि उसे यूँ ही बेकार छोड़ दिया जायेगा?
- 75:37أَلَمْ يَكُ نُطْفَةً مِّن مَّنِىٍّ يُمْنَىٰक्या वह वीर्य की एक बूंद नहीं था, जो (गर्भाशय में) गिराई जाती है?
- 75:38ثُمَّ كَانَ عَلَقَةً فَخَلَقَ فَسَوَّىٰफिर वह जमे हुए रक्त का टुकड़ा हुआ, फिर अल्लाह ने पैदा किया और दुरुस्त बनाया।
- 75:39فَجَعَلَ مِنْهُ ٱلزَّوْجَيْنِ ٱلذَّكَرَ وَٱلْأُنثَىٰٓफिर उसने उससे दो प्रकार : नर और मादा बनाए।
- 75:40أَلَيْسَ ذَٰلِكَ بِقَٰدِرٍ عَلَىٰٓ أَن يُحِْۧىَ ٱلْمَوْتَىٰक्या वह इसमें समर्थ नहीं कि मुर्दों को जीवित कर दे?
सूरह सुनेंMishary Alafasy