102. सूरह अत-तकासुर
The Rivalry in world increase
ٱلتَّكَاثُر

सूरह अत-तकासुर

The Rivalry in world increase
8 आयतेंमक्की

सूरह अत-तकासुर (التكاثر, अर्थ: The Rivalry in world increase) क़ुरआन की 102वीं सूरह है। यह मक्की सूरह है जिसमें 8 आयतें हैं, और यह पारा 30 में मदनी मुसहफ़ के पृष्ठ 600 से शुरू होती है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
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सूरह अत-तकासुर की सभी आयतें — अरबी और हिंदी अनुवाद

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  1. 102:1أَلْهَىٰكُمُ ٱلتَّكَاثُرُतुम्हें (धन, संतान की) बहुतायत पर गर्व ने ग़ाफ़िल कर दिया।
  2. 102:2حَتَّىٰ زُرْتُمُ ٱلْمَقَابِرَयहाँ तक कि तुम क़ब्रिस्तान जा पहुँचे।
  3. 102:3كَلَّا سَوْفَ تَعْلَمُونَकदापि नहीं, तुम शीघ्र ही जान लोगे।
  4. 102:4ثُمَّ كَلَّا سَوْفَ تَعْلَمُونَफिर कदापि नहीं, तुम शीघ्र ही जान लोगे।
  5. 102:5كَلَّا لَوْ تَعْلَمُونَ عِلْمَ ٱلْيَقِينِकदापि नहीं, यदि तुम निश्चित ज्ञान के साथ जान लेते (तो ऐसा न करते)।
  6. 102:6لَتَرَوُنَّ ٱلْجَحِيمَनिश्चय तुम अवश्य जहन्नम को देखोगे।
  7. 102:7ثُمَّ لَتَرَوُنَّهَا عَيْنَ ٱلْيَقِينِफिर निश्चय तुम उसे अवश्य विश्वास की आँख से देखोगे।
  8. 102:8ثُمَّ لَتُسَْٔلُنَّ يَوْمَئِذٍ عَنِ ٱلنَّعِيمِफिर निश्चय तुम उस दिन नेमतों के बारे में अवश्य पूछे जाओगे।
सूरह सुनेंMishary Alafasy