ٱلْإِنْشِقَاق
सूरह अल-इंशिकाक
The Sundering
25 आयतेंमक्की
सूरह अल-इंशिकाक (الإنشقاق, अर्थ: The Sundering) क़ुरआन की 84वीं सूरह है। यह मक्की सूरह है जिसमें 25 आयतें हैं, और यह पारा 30 में मदनी मुसहफ़ के पृष्ठ 589 से शुरू होती है।
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
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सूरह अल-इंशिकाक की सभी आयतें — अरबी और हिंदी अनुवाद
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- 84:1إِذَا ٱلسَّمَآءُ ٱنشَقَّتْजब आकाश फट जाएगा।
- 84:2وَأَذِنَتْ لِرَبِّهَا وَحُقَّتْऔर अपने पालनहार के आदेश पर कान लगाएगा और यही उसके योग्य है।
- 84:3وَإِذَا ٱلْأَرْضُ مُدَّتْतथा जब धरती फैला दी जाएगी।
- 84:4وَأَلْقَتْ مَا فِيهَا وَتَخَلَّتْऔर जो कुछ उसके भीतर है, उसे निकाल बाहर फेंक देगी और खाली हो जाएगी।
- 84:5وَأَذِنَتْ لِرَبِّهَا وَحُقَّتْऔर अपने पालनहार के आदेश पर कान लगाएगी और यही उसके योग्य है।
- 84:6يَٰٓأَيُّهَا ٱلْإِنسَٰنُ إِنَّكَ كَادِحٌ إِلَىٰ رَبِّكَ كَدْحًا فَمُلَٰقِيهِऐ इनसान! निःसंदेह तू कठिन परिश्रम करते-करते अपने पालनहार की ओर जाने वाला है, फिर तू उससे मिलने वाला है।
- 84:7فَأَمَّا مَنْ أُوتِىَ كِتَٰبَهُۥ بِيَمِينِهِۦफिर जिस व्यक्ति को उसका कर्मपत्र उसके दाहिने हाथ में दिया गया।
- 84:8فَسَوْفَ يُحَاسَبُ حِسَابًا يَسِيرًاतो उसका आसान हिसाब लिया जाएगा।
- 84:9وَيَنقَلِبُ إِلَىٰٓ أَهْلِهِۦ مَسْرُورًاतथा वह अपने लोगों की ओर ख़ुश-ख़ुश लौटेगा।
- 84:10وَأَمَّا مَنْ أُوتِىَ كِتَٰبَهُۥ وَرَآءَ ظَهْرِهِۦऔर लेकिन जिसे उसका कर्मपत्र उसकी पीठ के पीछे दिया गया।
- 84:11فَسَوْفَ يَدْعُوا۟ ثُبُورًاतो वह विनाश को पुकारेगा।
- 84:12وَيَصْلَىٰ سَعِيرًاतथा जहन्नम में प्रवेश करेगा।
- 84:13إِنَّهُۥ كَانَ فِىٓ أَهْلِهِۦ مَسْرُورًاनिःसंदेह वह अपने घर वालों में बड़ा प्रसन्न था।
- 84:14إِنَّهُۥ ظَنَّ أَن لَّن يَحُورَनिश्चय उसने समझा था कि वह कभी (अल्लाह की ओर) वापस नहीं लौटेगा।
- 84:15بَلَىٰٓ إِنَّ رَبَّهُۥ كَانَ بِهِۦ بَصِيرًاक्यों नहीं, निश्चय उसका पालनहार उसे देख रहा था।
- 84:16فَلَآ أُقْسِمُ بِٱلشَّفَقِमैं क़सम खाता हूँ शफ़क़ (सूर्यास्त के बाद की लाली) की।
- 84:17وَٱلَّيْلِ وَمَا وَسَقَतथा रात की और उसकी जो कुछ वह एकत्रित करती है!
- 84:18وَٱلْقَمَرِ إِذَا ٱتَّسَقَतथा चाँद की, जब वह पूरा हो जाता है।
- 84:19لَتَرْكَبُنَّ طَبَقًا عَن طَبَقٍतुम अवश्य एक अवस्था से दूसरी अवस्था में स्थानांतरित होते रहोगे।
- 84:20فَمَا لَهُمْ لَا يُؤْمِنُونَफिर उन्हें क्या हो गया है कि वे ईमान नहीं लाते?
- 84:21وَإِذَا قُرِئَ عَلَيْهِمُ ٱلْقُرْءَانُ لَا يَسْجُدُونَ ۩और जब उनके सामने क़ुरआन पढ़ा जाता है, तो सजदा नहीं करते।
- 84:22بَلِ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ يُكَذِّبُونَबल्कि जिन्होंने कुफ़्र किया, वे (उसे) झुठलाते हैं।
- 84:23وَٱللَّهُ أَعْلَمُ بِمَا يُوعُونَऔर अल्लाह सबसे अधिक जानने वाला है जो कुछ वे अपने भीतर रखते हैं।
- 84:24فَبَشِّرْهُم بِعَذَابٍ أَلِيمٍअतः उन्हें एक दर्दनाक यातना की शुभ सूचना दे दो।
- 84:25إِلَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّٰلِحَٰتِ لَهُمْ أَجْرٌ غَيْرُ مَمْنُونٍۭपरंतु जो लोग ईमान लाए तथा उन्होंने सत्कर्म किए, उनके लिए कभी न समाप्त होने वाला बदला है।
सूरह सुनेंMishary Alafasy